आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की चल रही परीक्षाओं के दौरान लगातार पेपर लीक होने से खलबली मची हुई है। मामले में आज उच्च शिक्षा मंत्री ने भी बैठक बुलाई थी। उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा पेपर लीक करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। वह परीक्षा नियंत्रक की कार्यशैली पर भी नाराज हुए। उच्च शिक्षा मंत्री के निर्देश पर कुलपति ने परीक्षा नियंत्रक का चार्ज अब कुलसचिव को दे दिया है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय द्वारा ली गई बैठक में एसएसपी सुधीर कुमार सिंह, एसपी सिटी विकास कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक पहुंचे। विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों को मीटिंग हॉल के बाहर ही खड़ा कर दिया गया। उच्च शिक्षा मंत्री ने लगातार लीक हो रहे पेपर को लेकर नाराजगी व्यक्त की। एसएसपी से उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एसएसपी ने उन्हें बताया मामले में गंभीरता से जांच चल रही है। पुलिस की कई टीमें लगी हुई हैं। जल्दी ही दोषियों पर कार्रवाई होगी। बैठक में कुलपति से भी उच्च शिक्षा मंत्री ने कई सवाल जवाब किए। इसका नतीजा बैठक खत्म होने के बाद नजर आया। कुलपति ने सर्किट हाउस से आकर गेस्ट हाउस में मीटिंग की। इसमें उन्होंने कहा कि अग्रिम आदेशों तक तत्काल प्रभाव से कुलसचिव संजीव कुमार सिंह को परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है। आज के बाद संपन्न होने वाली सभी परीक्षाएं कुलसचिव की निगरानी में संपन्न होंगी। तत्काल प्रभाव से सभी नोडल केंद्रों पर विश्वविद्यालय द्वारा एक एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री के साथ बैठक के बाद कुलपति अन्य अधिकारियों को परीक्षा कार्यों में बदलाव और सुधार के संबंध में लिये गये निर्णय की जानकारी देते हुए
कुलपति ने कहा की नोडल केंद्रों से निकलने वाले प्रश्न पत्रों के सभी पैकेट सीलबंद रूप में परीक्षा केंद्रों पर रवाना किए जाएं और किसी भी परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र 30 मिनट से पहले नहीं पहुंचें। विश्वविद्यालय द्वारा चार वरिष्ठ आचार्यों ( प्रोफेसर उमेश चंद्र शर्मा, प्रोफेसर प्रदीप श्रीधर, प्रोफेसर बिंदुशेखर शर्मा, प्रोफेसर भूपेंद्र स्वरूप शर्मा ) की एक एक टीम बनाई जाएगी, जिसमें उनके साथ एक-एक सहायक कुलसचिव और अन्य शिक्षक होंगे। यह टीम सभी जिलों में लगातार निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी परीक्षा केंद्र पर प्रश्न पत्र 30 मिनट से पहले ना पहुंचे ।
प्रोफेसर वीके सारस्वत और प्रोफेसर मनु प्रताप सिंह भी लगातार नियंत्रण कक्षों से नोडल केंद्रों पर खुलने वाले प्रश्न पत्रों की निगरानी करेंगे। सभी नोडल केंद्रों पर अत्याधुनिक तकनीक से युक्त RFID ( रेडियो फ्रिकवेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस ) लॉक लगाए जाएंगे। आरएफआईडी की डिजिटल तकनीक में नोडल केंद्र के स्ट्रांग रूम में और बाहर दो दो वीडियो कैमरे लगाए जाते हैं। स्ट्रांग रूम से बाहर लगने वाले इस लॉक पर एक इलेक्ट्रॉनिक चिप लगी होगी, जिसका कंट्रोल रूम विश्वविद्यालय में होगा। जब विश्वविद्यालय से कमांड दिया जाएगा तभी स्ट्रांग रूम का ताला खुलेगा। इस डिजिटल लॉक की सुविधा होने से विश्वविद्यालय का सभी नोडल केंद्रों पर नियंत्रण सुनिश्चित हो जाएगा। सभी नोडल केंद्रों से भेजी जाने वाली टैक्सियों में जीपीएस लगवाकर उनकी लोकेशन ट्रेस की जाएगी।











