आगरा। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने सोमवार को विकास भवन सभागार में केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) – वीबी-जी राम जी अधिनियम 2025” की विस्तार से जानकारी दी।
केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि संसद में इस अधिनियम पर 48 घंटे तक गहन चर्चा के बाद इसे पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में लागू मनरेगा योजना के अंतर्गत अब तक 86 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन ग्रामीण विकास के आधारभूत ढांचे में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मनरेगा अधिनियम में आमूलचूल सुधार किए गए हैं। प्रो. बघेल ने कहा कि पुराने सिस्टम में राज्यों की मनमानी, भ्रष्टाचार, पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा अपने लोगों का नामांकन, श्रमिकों का शोषण और पारदर्शिता की भारी कमी देखने को मिली। कई राज्यों में तो 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के नाम भी मनरेगा में जोड़कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक गांवों में बुनियादी ढांचे का विकास, नागरिक सुविधाओं का विस्तार और खेती-किसानी को समृद्ध नहीं किया जाएगा।
125 दिन की कानूनी रोजगार गारंटी
नए अधिनियम के तहत अब ग्रामीण श्रमिकों को 100 की जगह 125 दिन की रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी। पहले औसतन केवल 50 दिन ही रोजगार मिल पाता था। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अब पंचायतों की खुली बैठक में कार्यों का निर्धारण होगा। योजना निर्माण का अधिकार ग्राम स्तर पर होगा। कार्यों का चयन ग्राम सभा में किया जाएगा। केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी 60:40 तय की गई है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी। समय पर भुगतान और बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। मजदूरी भुगतान की सात दिन की समय-सीमा तय की गई है। काम उपलब्ध न होने पर बेरोजगारी भत्ता स्वतः मिलेगा। एआई और डिजिटल निगरानी से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। उन्होंने बताया कि सभी कार्य “विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक” पर दर्ज किए जाएंगे। निगरानी के लिए एआई आधारित एनालिटिक्स, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जीपीएस/मोबाइल आधारित उपस्थिति, सोशल ऑडिट और जीपीएस ट्रैकिंग का प्रावधान किया गया है। इन व्यवस्थाओं से फर्जी जॉब कार्ड, बिचौलियों और ठेकेदार प्रथा पर पूरी तरह रोक लगेगी। किसी भी अनियमितता पर संबंधित अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय होगी।











