आगरा। जगदीशपुरा में जमीन पर कब्जा कराने वाले मामले में मुख्य आरोपियों को पकड़ने में पुलिस पूरे तरीके से फेल साबित हो रही है। फरार थानाध्यक्ष ने जिला जज के यहां एंटीसिपेटरी बेल भी डाल दी है। बिल्डर ने एफआईआर को खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका डाली है।
बता दें कि बोदला-जगदीशपुरा मार्ग पर बीएस कॉम्पलेक्स के पास दस हजार वर्ग गज जमीन पर जगदीशपुरा थाना पुलिस ने कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे लिखे। इनमें पुरुषों व महिलाओं को जेल भेज दिया। पहला मुकदमा 26 अगस्त 2023 को एनडीपीएस एक्ट का लिखा गया। पुलिस ने मौके से रवि कुशवाह, संकरिया और जटपुरा निवासी ओमप्रकाश को पकड़ा। मौके से एक वाहन बरामद दिखा। उसकी नंबर प्लेट फर्जी बताई गई। पुलिस ने टिर्री की नंबर प्लेट स्कूटर पर लगा दी। तीन पैकेट से नौ किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया। तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। नौ अक्तूबर को उसी जगह आबकारी निरीक्षक ने छापा मारा। मौके पर रह रहीं पूनम और उसकी नदद पुष्पा व फुरकान को पकड़ा। जगदीशपुरा थाने में आबकारी अधिनियम का मुकदमा लिखा गया। धोखाधड़ी की धाराएं भी लगाई गईं। तीनों को जेल भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने वहां पर कब्जा करा दिया। मामले में डीजीपी से शिकायत होने के बाद एक एसपी जांच के लिए आए थे। एसपी के आने के बाद आगरा कमिश्नरेट के अधिकारियों के पसीने छूट गए। तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी उपेंद्र मिश्रा, शिवराज सिंह व आरक्षी रविकांत को निलंबित किया गया। मामले में थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार, बिल्डर और उनके बेटे आदि के खिलाफ डकैती सहित अन्य गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होते ही आरोपी फरार हो गए। अभी तक परिवार को धमकी देने वाले पहलवान, फरार थानाध्यक्ष जितेंद्र, बिल्डर और उसका बेटा कहां छिपे हैं यह पुलिस ट्रेस भी नहीं कर सकी है।
पता चला है कि फरार थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार की ओर से उनके अधिवक्ता ने सत्र न्यायालय में अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थना पत्र एडीजे कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है। इस पर 16 जनवरी की तारीख पड़ी है। इससे इतना तो साफ हो गया है कि एसओ पुलिस के हाथ नहीं आना चाहता। वह जानता है कि पुलिस ने पकड़ा तो सीधे जेल भेजेगी। उससे सवाल-जवाब भी होंगे। वहीं पुलिस को जानकारी मिली है कि फरार बिल्डर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से उस मुकदमे को ही चैलेंज किया है जिसमें पुलिस ने उन्हें और उनके बेटे को आरोपित बनाया है। मुकदमा खारिज करने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है।
यू ट्यूबर का नाम आया था सामने, डीसीपी को दिए बयान
25 अगस्त को एक वीडियो वायरल किया गया था। जिसमें यह दावा किया गया था कि बैनारा फैक्ट्री के पास गांजा बेचा जाता है। माना जा रहा है कि साजिश के तहत यह वीडियो बनवाया गया। उसे वायरल कराया गया। पुलिस ने इसी वीडियो को आधार बनाकर कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की थी। वीडियो अधिकारियों को भी दिखाया गया था। ताकि उनसे दबिश के लिए अनुमति पत्र मिल सके। वीडियो एक यू ट्यूबर ने भी चलाया था। शुक्रवार को यू ट्यूबर खुद ही डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय के सामने पहुंच गया। उसने डीसीपी सिटी को बताया कि यह वीडियो अकेले उसके पास नहीं था। यह वीडियो उसे एक चैनल के कैमरामैन ने उपलब्ध कराया था। कलक्ट्रेट में वीडियो दिया गया था। उसने यह आरोप भी लगाया कि गुरुवार की शाम कलक्ट्रेट के गेट के पास उसे तीन लोगों ने धमकाया। ये लोग वीडियो देने वाले कैमरामैन के साथी हैं। वह लिखित में अपना बयान देने के लिए तैयार है। वह अपना नार्को टेस्ट भी कराने के लिए तैयार है। कैमरामैन ने अकेले उसको नहीं कई लोगों को वीडियो दिया था। उसके अलावा कई लोगों ने वीडियो चलाया था।











