आगरा। रावतपाड़ा लाला चन्नोमल की बारादरी में बड़ा ही अदभुत नजारा था। समूचा रावतपाड़ा अयोध्या नगरी बना हुआ था। प्रभु श्रीराम की वरयात्रा सायं 4:50 बजे से प्रारम्भ हुई। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीरामचन्द्र जी की प्रथम आरती- जिलाधिकारी, एसएसपी, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष पुरूषोत्तम खण्डेलवाल, मंत्री राजीव कुंमार अग्रवाल द्वारा की गई।
शोभायात्रा में सबसे पहले दो ऊंट चल रहे थे। उनके पीछे छह घोड़े कोतवाल के रूप में और फिर विघ्न विनाशक गणेश जी की सवारी थी। इनके बाद आर्केष्ट्रा पार्टी के साथ भव्य एवं मनमोहक झांकियों का सिलसिला शुरू हो गया। मुख्य झांकियों में उड़ते भारत माता की झाँकी, अन्तर्राराष्ट्रीय विश्व हिन्दू परिषद की झाँकी, शिव सेना की झाँकी, अयोध्या का रोड शो, सत्यमेव जयते की झाँकी, सुदामा कृष्ण मिलन की झाँकी, मोर पर गणेश जी, कुबेर द्वारा धन की वर्षा, भस्मासुर का देवी जी से युद्ध, शिव पार्वती अघोरी खोपड़ी, फूलों की होली, राजस्थानी लंगुरिया, धारा 370, खुशहाल कश्मीर, पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि, पूतना कृष्ण को लेकर उड़ती हुई, चार घोड़े व गाय नाचते हुए रोड शो, राधा रानी फूलों की होली खेलते हुए, शंकर जी की बारात भूत-प्रेतों के साथ शंकर जी के सिर से गंगा का अवतरण, सीता हरण, गौ हत्या, शबरी बेर खिलाते हुए शिवलिंग लेकर उड़ता रावण, गोवर्धन की परिक्रमा देवी जी के नौ रूप पर्यावरण एवं जल पर शिव सेना की झांकी, नंदोत्सव, राधा-कृष्ण पानी के फुब्बारों पर नृत्य करते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, डोकलाम, नदी अस्तित्व बचाओ, यमुना शुद्धिकरण पशु हत्या, शराब न पीने की झांकी, गंगा अवतरण, नौका विहार, सुदामा चरित्र, समुद्र मंथन, सामाजिक झांकी, काली माता का नृत्य, घटोत्कच का कर्ण के साथ युद्ध, भांगड़ा पंजाबी डांस, गणेश जी डांडिया खेलते हुए, कृष्ण-अर्जुन रथ, घोड़ा बैण्ड, कदम के पेड़ के नीचे कृष्ण भगवान, महारास बालाजी दरबार रोड शो, काली माता का रोड शो, भोले के रंग में रंग गई रोड शो, शंकर पार्वती रोड शो, तीन कलर के बिहारी जी का रोड शो, फूलों की बांके बिहारी की झांकी सहित लगभग 125 झांकिया थी।
झांकियों के बाद मुख्य आकर्षण रामलीला कमेटी का रजत रथ जिसमें माँ लक्ष्मी जी भगवान विष्णु के साथ बिहारी जी की झांकी, उसके बाद महाराजा राजा दशरथ (संजय मित्तल अपने परिवार के साथ घोड़ों की बग्गी पर चल रहे थे) व सुमंत की बग्गी पर सवार झांकी, मुनि विश्वामित्र व वशिष्ठ की संयुक्त सवार बग्गी पर झांकी, सूर्यवंशी राजकुमार शत्रुघ्न के आगे सुधीर बैण्ड राजकुमार भरत के आगे प्रहलाद बैण्ड, भ्राता लक्ष्मण के आगे मिलन बैण्ड, स्वयं प्रभु श्रीराम के आगे प्रतिष्ठित जगदीश बैण्ड मधु स्वर लहरियाँ बिखरते हुए चल रहे थे। अन्य बैण्डों में कुमार, चावला, श्री जी, गुप्ता बैण्ड सहित लगभग 11 बैण्ड चल रहे थे प्रभु राम अपने भाइयों के साथ सुसज्जित रथ पर राजसी श्रृंगार में चल रहे थे। प्रभू श्री राम का रथ देवराज इन्द्र का ऐरावत हाथी था।
मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम बारात का संचालन उपाध्यक्ष / रामबारात प्रभारी मुकेश अग्रवाल के नेतृत्व में आनन्द मंगल, अंजुल बंसल, संजय तिवारी, मनोज डॉजरी, मोहित गोयल, रामांशु शर्मा, मुकेश जौहरी, प्रकाशचन्द द्वारा किया गया रामबारात की समस्त व्यवस्थाओं का संचालन अध्यक्ष पुरूषोत्तम खण्डेलवाल, मंत्री राजीव अग्रवाल, कोषाध्यक्ष अतुल बंसल एवं मीडिया प्रभारी राहुल गौतम द्वारा किया गया।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की वरयात्रा में चारों भाईयों राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के श्रृंगार का भी विशेष महत्व है। राकेश अग्रवाल द्वारा बताया गया कि चारों भाई दूल्हा बने राजसी श्रृंगार में नजर आये। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम रत्न जड़ित कमल मुकुट धारण किए हुए हैं तथा सूर्य अपनी आभा बिखेर रहा है। शेषावतार लक्ष्मण रत्न जड़ित मुकुट धारण किए हुए हैं, उनके मुकुट पर शेषनाग हैं, भ्राता भरत के मुकुट पर कमल का फूल अपनी अद्भुत छटा बिखेर रहा है तथा भगवान का मुख श्रृंगार अनोखी आभा लिये हुए है। शत्रुघ्न भी मुकुट पर मध्य में कमल का फूल बना हुआ चांदी का रत्न जड़ित मुकुट धारण किए हुए हैं। राम का श्रृंगार मोहित व राहुल मुकुल द्वारा, लक्ष्मण जी का रजत व कन्हैया राममोहन, भरत का रवि व अमित एवं शत्रुध्न का श्रृंगार हैपी व सुमित द्वारा किया गया।
रामबारात शुरू होने से पूर्व जगत जननी जानकी जी व चार सखियों को राजसी श्रृंगार के साथ जनकपुरी भेजा गया। माँ जानकी का मुकुट रत्न जड़ित मुकुट है। उनकी छवि देखकर ऐसा लग रहा है मानो स्वयं माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर उतर आयीं हों। लाखों-लाख नर-नारियों की श्रृंगार से निगाह नहीं हट रही है। प्रभू श्री राम की छवि देखकर त्रेता युग की याद आ रही है। सीता माता का श्रृंगार मनोज पोली व सौरभ गौतम द्वारा किया गया।












