आगरा। मुगल काल में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान हिंदुओं और किसानों पर हुए अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले हिंदू वीर, सनातन धर्म रक्षक एवं किसान नायक वीर गोकुला जाट की स्मृति को चिरस्थायी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। आगरा की ऐतिहासिक कोतवाली पर शीघ्र ही वीर गोकुला जाट की भव्य प्रतिमा एवं शिलालेख स्थापित किया जाएगा।
फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर, महापौर हेमलता दिवाकर, नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने नगर निगम की टीम के साथ कोतवाली क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उस स्थल को अंतिम रूप से चिन्हित किया गया, जहां वीर गोकुला जाट का बलिदान हुआ था। यह प्रतिमा स्थल कोतवाली के समीप ही स्थापित किया जाएगा। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि औरंगज़ेब के शासनकाल में जब हिंदू समाज पर अत्याचार बढ़े, मंदिरों को ध्वस्त किया गया और किसानों पर अनैतिक कर थोपे गए, तब वीर गोकुला जाट ने किसानों को संगठित कर लगभग 20 हजार किसानों की सेना तैयार की। उन्होंने मुगल शासक औरंगज़ेब के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष छेड़ा और अत्याचार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। बताया जाता है कि इस संघर्ष के दौरान मुगल सेना के एक प्रमुख सेनापति को वीर गोकुला जाट एवं उनकी किसान सेना ने युद्ध में परास्त किया। इसके बाद युद्ध के क्रम में वीर गोकुला जाट को गिरफ्तार कर आगरा की कोतवाली में बंदी बनाया गया। इतिहास के अनुसार उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला गया, लेकिन वीर गोकुला जाट ने सनातन धर्म से विचलित होने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उनकी इसी अडिग आस्था और साहस के कारण उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं और अंततः उन्होंने धर्म एवं स्वाभिमान की रक्षा करते हुए बलिदान दिया। गोकुला जाट के साथ उनके चाचा उदय सिंह ने भी बलिदान दिया।











