इस्लामाबाद। अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने और नेशनल असेंबली भंग होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस बीच पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने चुनाव आयोग को एक चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में राष्ट्रपति ने 90 दिन के अंदर चुनाव कराने को कहा है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीटीआई के सांसद फवाद चौधरी की मीडिया से बहस हो गई। इसके बाद पत्रकारों ने फवाद चौधरी से माफी की मांग करते हुए कॉन्फ्रेंस का बायकॉट कर दिया। दूसरी तरफ, इमरान ने सुप्रीम कोर्ट से उनकी सरकार गिराने के लिए हो रही विदेशी साजिश की जांच की मांग की है। इसके लिए उन्होंने जजों के एक आयोग के गठन की अपील की है।
इमरान खान ने रविवार को देश के नाम संदेश में दावा किया था कि नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की मीटिंग में फौज और आईएसआई के चीफ भी मौजूद थे और इस मीटिंग में उन्होंने विदेशी साजिश वाला लेटर सबूत के तौर पर रखा था। खान का दावा था कि फौज और बदनाम खुफिया एजेंसी ने भी माना था कि इमरान सरकार के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के पीछे विदेश ताकत का हाथ था। फौज ने साफ कर दिया है कि वो इमरान सरकार गिराने के मामले में विदेशी साजिश का कोई सबूत उसे नहीं मिला है। यह खान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
इमरान सरकार के कई मंत्री अफवाह फैला रहे हैं कि इलेक्शन कमीशन ने 90 दिन के अंदर चुनाव कराने से इनकार कर दिया है। हालांकि इलेक्शन कमीशन ने साफ कर दिया कि उसने कभी तीन महीने के अंदर चुनाव कराने से इनकार नहीं किया।
चीफ जस्टिस ने इमरान सरकार के वकील से मांगे एनएससी बैठक के मिनट्स, कहा- आरोपों पर आधारित है डिप्टी स्पीकर का फैसला
पाकिस्तान के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने सुनवाई के दौरान इमरान सरकार के वकील बाबर अवान से एनएससी की बैठक के मिनट्स मांगे हैं। इसी मीटिंग में इमरान ने एनएससी के साथ विदेशी साजिश के सबूत वाला लेटर साझा करने का दावा किया था। साथ ही चीफ जस्टिस ने कहा- डिप्टी स्पीकर का फैसला तथ्य नहीं बल्कि आरोपों पर आधारित है।











