-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जा कराने को फिल्मी स्टाइल में पटकथा लिखी गई थी। पटकथा में कई किरदारों के नाम सुर्खियों में आ रहे हैं। चर्चा है कि गरीब परिवार पर अत्याचार की सीमाएं लांघने में एक माननीय, पूर्व ब्लाक प्रमुख, होटल संचालक, बिल्डर, एक चर्चित शामिल रहे। कब्जा कराने के लिए पुलिस वालों को लालच देकर ‘पुलिस वाला गुंडा’ बनाया गया। काम हो जाने के बाद मामले को ऐसे दबा दिया गया जैसे गड्डे को मिट्टी डालकर दबा दिया जाता है। लेकिन सभी किरदार यह भूल गए कि सच्चाई कभी छिपती नहीं है।
बोदला चौकी क्षेत्र में बेशकीमती चार बीघा जमीन पर जो कि करोड़ों रुपये की है, लंबे समय से कब्जे के प्रयास चल रहे हैं। क्यों कि यह जमीन 50 करोड़ की बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि बिल्डर ने एक माननीय को इसे खाली कराने का ठेका दिया था लेकिन वह कुछ नहीं करा पाए। इसके बाद एक होटल संचालक जो कि जूता व्यापारी भी हैं और एक माननीय का चहेता है उससे भी बात की गई। होटल संचालक ने गारंटी दे दी कि माननीय और उनके बेटे खेल में शामिल रहेंगे। काम करा दिया जाएगा। इधर इन सभी की कब्जा कराने की प्लानिंग तो बन गई लेकिन कब्जा हो कैसे? पुलिस वाला गुंडा कहां से खोजा जाए? इसके लिए होटल संचालक ने अपने एक अजीज मित्र, जो पूर्व ब्लाक प्रमुख हैं, से संपर्क किया गया। इनका बीते कुछ सालों से आगरा पुलिस में सिक्का बुलंद है, जिसके दरबार में हर समय जनता के लोग कम और पुलिस वाले ही ज्यादा दिखाई देते हैं। ट्रांसफर पोस्टिंग में पुलिसकर्मी अधिकारियों के पास कम और उसके पास ज्यादा कतार लगाए मिलते हैं। इस किरदार ने एक पुलिस वाला दबंग थाने में तैनात करा दिया। चर्चा यह भी है कि पूर्व ब्लाक प्रमुख के साथ माननीय ने भी इसकी तैनाती को सिफारिश की थी। अब यह तो साहब ही जानते हैं कि उन्हें बताया गया था या नहीं कि जमीन पर कब्जा कराने को उसे पोस्टिंग दिलाई जा रही है। पुलिस वाले दबंग ने थाने में तैनाती पाने के बाद सारी हदें पार कर दीं। कानून का पालन कराने वाले ने अपने हाथ से कानून को खिलौना बनाकर तोड़ा और पीड़ित परिवार को जेल भेजकर उन पर अत्याचार का बम फोड़ा। इस अत्याचार के बम के फूटने के बाद जो धुंआ निकला उस पर सभी किरदार प्रसन्न हुए। वह इसी खुशी में थे कि हम एक झटके में 50 करोड़ के मालिक हो गए और किसी को कानों कान खबर भी नहीं हुई। इनके साथ शामिल एक चर्चित व्यक्ति ने भी उनका सहयोग किया। लेकिन पीड़ितों को फर्जी तरीके से जेल भेजने और ईश्वर रूप माने जाने वाले बच्चे (जो तीन साल का बच्चा जेल गया) के आंसुओं से ऊपर वाला पिघल गया और पुलिस की गुंडई, चालबाजी की पोल खोलकर रख दी। जिस गति से कब्जा हुआ उससे दूनी गति से यह बात उजागर भी हुई कि कब्जा कराया गया है और किरदारों के नाम भी सामने आने लगे। स्वयं पुलिस कमिश्नर ने पत्रकार वार्ता में कहा है कि पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज किए और जमीन पर कब्जा कराया। सवाल यह है कि यह काम पुलिस ने अपनी तरफ से तो किया नहीं है। किरदारों के कहने पर किया है। क्या इन किरदारों पर शिकंजा कसा जाएगा? क्या इनके नाम उजागर किए जाएंगे? क्या मामले की निष्पक्षता से जांच होगी? क्या अधिकारी भी मामले में संलिप्त नहीं हैं? यह जानने के लिए शहर ही नहीं अब पूरा प्रदेश उतावला है क्योंकि इस कांड ने सनसनी फैला दी है।
पांच जनवरी को बिल्डर और थानाध्यक्ष पर होटल में बुलाकर धमकी देने का आरोप
रवि कुशवाहा के रिश्तेदार मोहित कुशवाहा का आरोप है कि 5 जनवरी को सुबह बिल्डर और थानाध्यक्ष जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार ने उन्हें पीएल पैलेस होटल में बुलाया था। बिल्डर ने उनसे पूछा कि क्या चाहते हो। इस पर उन्होंने जवाब दिया की जमीन। इस पर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार बोले जमीन को भूल जाओ। उनसे कहा गया कि पैसा जितना चाहिए ले लो। मोहित का कहना है कि मना करने पर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने कहा कि तुम्हारे साथ कोई भी हादसा हो सकता है। गोली भी पड़ सकती है। देर रात डीसीपी सिटी होटल पीएल पैलेस में सीसीटीवी चेक करने के लिए पहुंच गए हैं।
क्या पूर्व ब्लाक प्रमुख की शरण में हैं फरार थानाध्यक्ष?
डीसीपी सिटी सूरज राय का कहना है कि थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार फरार है। उसके शाहगंज स्थित घर पर दबिश दी गई लेकिन वह नहीं मिला। इधर चर्चा यह है कि वह पूर्व ब्लाक प्रमुख के लगातार संपर्क में है। दोनों की कॉल डिटेल निकाल दी जाए तो खुलासा भी हो जाएगा। पूर्व ब्लाक प्रमुख ही उसे शरण दिए हुए हैं। चर्चा यह भी है कि अधिकारी भी यह जानते हैं लेकिन उस पर हाथ नहीं डाल सकते। उसके एक बड़े साहब से अजीज संबंध बताए जाते हैं।
एक इंस्पेक्टर फरार बिल्डर के घर में रह रहे थे
एक इंस्पेक्टर फरार बिल्डर के घर में रह रहे थे। यह बात अधिकारियों तक पहुंची तो तत्काल कहा गया कि पांच मिनट में ट्रक मंगाकर सामान ले जाओ नहीं तो लखनऊ तक सूचना पहुंच जाएगी। इसके बाद उनके द्वारा आवास खाली कर दिया है। डीसीपी सिटी का कहना है कि उन्होंने बिल्डर को पकड़ने के लिए भी दबिश दी लेकिन वह भी फरार है।
दबिश का खेल दिखावा या वास्तविकता
पुलिस ने करोड़ों की जमीन पर कब्जा कराकर अपनी छवि को धूमिल कर दिया है। इसके बाद यह बात भी समझ नहीं आ रही है कि दबिश सिर्फ फोटो खिचाने और लखनऊ को अवगत कराने के लिए है या बास्तव में आरोपियों को पकड़ने के लिए। अगर पुलिस उन्हें पकड़ना चाहती तो रविवार को मुकदमा दर्ज करते ही पकड़ सकती थी, भागने का मौका नहीं देती।
क्या थानाध्यक्ष ले देगा अधिकारी का नाम?
पुलिस विभाग में यह चर्चा भी हो रही है कि थानाध्यक्ष पकड़े जाने के बाद उन अधिकारी का भी नाम ले देगा जो उसके साथ संलिप्त थे।
दरोगाओं के निलंबन की जगह प्रारंभिक जांच
दरोगा आशीष त्यागी ने एनडीपीएस वाली विवेचना की थी। जब मुकदमा फर्जी लिखा गया है। यह बात स्वयं अधिकारी कह रहे हैं तो चार्जशीट भी तो गलत हुई। फिर भी दरोगा की प्रारंभिक जांच कराई जा रही है। निलंबित नहीं किया जा रहा। दरोगा शक्ति राठी प्रार्थना पत्र को 100 दिन तक दाबे रहे फिर भी प्रारंभिक जांच हो रही है। अनुज फोगाट की भी प्रारंभिक जांच हो रही है। डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि तीनों दरोगाओं की प्रारंभिक जांच शुरू करा दी गई है।
गेट पर माननीय का नाम, फोटो वायरल
जिस जमीन पर कब्जा किया गया है उस पर एक माननीय का नाम लिखा हुआ था। यह फोटो वायरल हो रहा है। गेट पर क्षेत्रीय कार्यालय और संबंधित विधानसभा क्षेत्र लिखा है। इसके अलावा माननीय का नाम और मोबाइल नंबर भी है।
कुशवाहा महासभा ने शहीद स्मारक पर दिया धरना
पीड़ित कुशवाहा परिवार के साथ हुए अन्याय को लेकर अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा के द्वारा सोमवार को शहीद स्मारक पर धरना दिया गया। इसमें राष्ट्रीय महासचिव प्रेम सिंह कुशवाहा ने कहा की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। अगर 5 दिन में गिरफ्तारी नहीं हुई तो कुशवाहा समाज के द्वारा आंदोलन किया जाएगा। धरने में मनोज कुशवाहा, विनोद कुशवाहा, योगेश कुशवाहा, धर्मेंद्र कुशवाहा, सनी कुशवाहा, आकाश कुशवाहा, उदय सिंह कुशवाहा, धर्म गंगा प्रसाद आदि शामिल रहे।











