आगरा। आगरा कमिश्नरेट में तैनात एक और इंस्पेक्टर की भ्रष्टाचार के मामले में विजिलेंस जांच चल रही है। गोपनीय जांच में वह दोषी भी पाए जा चुके हैं। खुली जांच शुरू हो गई है। इसके बावजूद वह चार्ज पर हैं। यह देख शिकायतकर्ता ने पुलिस कमिश्नर से उन्हें चार्ज से हटाने के लिए पत्र लिखा है। पुलिस कमिश्नर क्या एक्शन लेंगे, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
संजय सिंह नाम के व्यक्ति ने पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजकर शिकायत की है कि आगरा कमिश्नरेट में चार्ज पर तैनात एक इंस्पेक्टर की झांसी विजिलेंस सेक्टर के द्वारा भ्रष्टाचार की जांच की जा रही है। आरोप लगाया गया है कि जब वह कन्नौज में तैनात थे तो उन्होंने पैसा लेकर जमीन पर अवैध कब्जा करा दिया था। विरोध करने पर पूरे परिवार को हवालात में बंद कर फर्जी मुकदमा दर्ज कर लिया था। छोड़ने के नाम पर पैसे भी लिए गए थे। मामले में रिश्वत का वीडियो वायरल होने के बाद विजिलेंस जांच बैठी थी। इसके बाद जब वह तीन जिलों में पोस्ट रहे और वहां के कप्तान के संज्ञान में यह बात आई कि उनकी भ्रष्टाचार संबंधी विजिलेंस जांच चल रही है तो उन्हें चार्ज से हटा दिया गया। आगरा में भी उन्हें चार्ज से हटाने के लिए पुलिस कमिश्नर से शिकायतकर्ता ने मांग की है। शिकायतकर्ता के द्वारा मुख्यमंत्री, डीजी विजिलेंस से भी शिकायत की गई है कि इंस्पेक्टर की भ्रष्टाचार संबंधी विजिलेंस जांच चल रही है उसके बावजूद उन्हें चार्ज दिया जा रहा है। पत्र में पुलिस कमिश्नर से भी कहा गया है कि थाने का चार्ज मिलने के बाद वह पद का दुरुपयोग कर जांच को प्रभावित कर रहे हैं।
थानाध्यक्ष बरहन की भी चल रही थी विजिलेंस जांच और थे चार्ज पर
आगरा। बरहन थाने में चार्ज पर चल रहे कुलदीप चौहान की भी भ्रष्टाचार संबंधी विजिलेंस जांच चल रही थी। गोपनीय जांच के बाद खुली जांच में भी वह दोषी गए थे। इसके बावजूद वह चार्ज पर थे। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें चार्ज से हटाया गया है। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि दागी पुलिस कर्मियों को आखिर चार्ज क्यों दिया जा रहा है? क्या चार्ज के लिए और पुलिसकर्मी नहीं है? कुछ को तो 10 दिन के अंदर ही एक के बाद दूसरे थाने में तैनात किया जा रहा है।











