-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में नवंबर माह में हुई कार्यपरिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित हुआ था कि आवासीय संस्थानों में जो पूर्व में निदेशक थे, वही दोबारा बनाये जाएंगे। पूर्व कुलपति प्रो. विनय पाठक द्वारा बनाये गये निदेशक हटाये जाएंगे, क्योंकि वह नियम विरुद्ध बनाये गये थे। इधर वर्तमान कुलपति द्वारा पूर्व वाले निदेशकों को ही दोबारा निदेशक बनाए जाने का पत्र न निकालकर अध्यादेश में संशोधन के नाम पर एक समिति बनाने का पत्र निकलवा दिया गया है। समिति में एक सदस्य तो वर्तमान में निदेशक हैं। प्रो. पाठक ने उन्हें निदेशक बनाया था। एक अन्य सदस्य वह हैं जिनके द्वारा पूर्व कुलपति प्रो. पाठक के कार्यकाल में निदेशकों को बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। ऐसे में इस समिति की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पूर्व कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक द्वारा कई संस्थानों के निदेशकों को बदला गया था। संविदा के शिक्षकों को निदेशक बना दिया था और स्थाई प्रोफेसर उनके अधीन कर दिए थे। हटाये गये निदेशकों ने इस बात का विरोध भी किया था। उनका कहना था कि विभागाध्यक्ष पद पर चकानुक्रम है, निदेशक पद पर नहीं।
बताया जा रहा है कि पूर्व कुलपति प्रो. अजय तनेजा और डीन अकेडमिक प्रो. संजीव कुमार के प्रस्ताव पर प्रो. पाठक ने निदेशक बदले थे। बीते दिनों हुई कार्यपरिषद की बैठक में इस बात को लेकर सभी सदस्यों ने आवाज उठाई कि प्रो. पाठक के समय में प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा और डीन अकेडमिक संजीव कुमार की रिपोर्ट पर जो निदेशक बनाए गए हैं, वह गलत बनाए गए थे, उन्हें हटाकर पूर्व वाले ही बनाए जाएं। जानकारों का दावा है कि बैठक में कुलपति प्रो. आशु रानी ने प्रो. पाठक की तरफदारी की थी लेकिन विरोध के बाद प्रस्ताव पास हुआ कि पूर्व वाले ही प्रोफेसर निदेशक बना दिए जाएंगे।
नये घटनाक्रम के तहत कुलपति प्रो. आशु रानी ने ईसी के पारित प्रस्ताव को लागू करने की बजाय एक समिति बना दी। इसमें उन्होंने प्रति कुलपित प्रो. अजय तनेजा, प्रो. यूसी शर्मा, प्रो. अर्चना गक्खर को सदस्य बनाया है। यह समिति निदेशक पद पर अध्यादेश में संशोधन पर रिपोर्ट देगी। कई प्रोफेसर इस समिति पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।
प्रोफेसरों का कहना है कि प्रति कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने प्रो. पाठक के समय में संविदा शिक्षकों को भी निदेशक बनाने का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा प्रो. यूसी शर्मा केएमआई में निदेशक हैं और लाभार्थी हैं। ऐसे में निष्पक्ष रिपोर्ट मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
इधर नवंबर माह में हुई कार्यपरिषद की मिनिटस शुक्रवार को आ गईं। इसमें मद संख्या एक में कहा गया है कि प्रो. अजय तनेजा ने प्रो. पाठक के समय में हुई ईसी में सभी हटने वाले निदेशकों से पूछकर उन्हें बदलवाया था। पूर्व निदेशकों का कहना है कि यह झूठ है। किसी से नहीं पूछा गया।











