-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा कराने के मामले में थानाध्यक्ष सहित कई लोगों पर डकैती सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया है। इसके साथ ही पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच के लिए डीसीपी सिटी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित कर दी है जो कि जल्दी ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। पीड़ित परिवार को भी उसी जगह पर काबिज कराया जा रहा है।
बता दें कि बोदला-जगदीशपुरा मार्ग पर बीएस कॉम्पलेक्स के पास दस हजार वर्ग गज जमीन पर जगदीशपुरा थाना पुलिस ने कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे लिखे। इनमें पुरुषों व महिलाओं को जेल भेज दिया। पहला मुकदमा 26 अगस्त 2023 को एनडीपीएस एक्ट का लिखा गया। पुलिस ने मौके से रवि कुशवाह, संकरिया और जटपुरा निवासी ओमप्रकाश को पकड़ा। मौके से एक वाहन बरामद दिखा। उसकी नंबर प्लेट फर्जी बताई गई। पुलिस ने टिर्री की नंबर प्लेट स्कूटर पर लगा दी। तीन पैकेट से नौ किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया। तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। नौ अक्तूबर को उसी जगह आबकारी निरीक्षक ने छापा मारा। मौके पर रह रहीं पूनम और उसकी नदद पुष्पा व फुरकान को पकड़ा। जगदीशपुरा थाने में आबकारी अधिनियम का मुकदमा लिखा गया। धोखाधड़ी की धाराएं भी लगाई गईं। तीनों को जेल भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने वहां पर कब्जा करा दिया। मामले में डीजीपी से शिकायत होने के बाद एक एसपी जांच के लिए आए थे। एसपी के आने के बाद आगरा कमिश्नरेट के अधिकारियों के पसीने छूट गए। डीसीपी सिटी सूरज राय की रिपोर्ट पर पुलिस आयुक्त ने तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी उपेंद्र मिश्रा, शिवराज सिंह व आरक्षी रविकांत को निलंबित कर दिया। जितेंद्र कुमार को जिस समय जगदीशपुरा थाने का चार्ज दिया गया था उसे समय भी यह बात सुर्खियों में छाई रही थी कि एक बार निलंबित और एक बार लाइन हाजिर हो चुके दरोगा को चार्ज क्यों दिया गया। वह भी बड़े इंस्पेक्टर थाने का। इस कांड के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या उन्हें ऐसे ही मामलों को निपटाने के लिए तो नहीं भेजा गया था? मामले में फजीहत होता देखकर पुलिस ने पीड़ित से तहरीर ली है।
इन लोगों के खिलाफ हुआ मुकदमा दर्ज

उमा देवी की तहरीर पर कमल चौधरी उनके बेटे धीरू चौधरी, तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और अन्य 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। उमा देवी ने तहरीर में कहा है कि उनकी जगह पर इन लोगों ने मिलकर कब्जा कर लिया और घर में रखा सामान भी लूटकर ले गए। इसके साथ ही अवैध हत्यार लहराते हुए धमकियां भी दी गईं। उन्होंने यह भी कहा है कि वर्ष 2017 में भी भू माफिया द्वारा कब्जा करने का प्रयास किया गया था लेकिन असफल रहे थे।
विवेचक कब होगा निलंबित, सवाल

आगरा। फर्जी मुकदमे में 22 दिन में चार्जशीट लगाने के मामले में विवेचक आशीष त्यागी कब निलंबित किए जाएंगे यह सवाल खड़े हो। कुछ ही महीने में वह तीन चौकी पर प्रभारी बन गए। यह बात भी सुर्खियों में छाई हुई है। सबसे पहले वह दीवानी चौकी पर प्रभारी रहे। चंद महीने में ही उन्हें अवधपुरी चौकी पर प्रभारी बना दिया गया। इसके बाद हाल ही में उन्हें ताजगंज की डिवीजन चौकी का प्रभारी बनाया गया है। वह भी अपनी कार्य प्रणाली को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्या विवेचक के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होगा यह सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस कमिश्नर का इस पर कहना है कि निर्दोषों के खिलाफ जिसने भी साजिश रची है। सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इधर आबकारी वाले मुकदमे में दरोगा अनुज फोगाट का भी नाम है उनको अभी तक निलंबित नहीं किया गया है। अधिकारी आखिर क्यों कृपा बरसा रहे हैं? यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है।
करोड़ों रुपए की डील होने की चर्चा
जमीन खाली कराने के लिए करोड़ों रुपए की डील होने की चर्चाएं जोरों पर चल रही हैं। एक चर्चित व्यक्ति का नाम बार-बार सामने निकल कर आ रहा है। बताया जा रहा है कि वह इन्हीं कामों का ठेका लेता है। कई अन्य कामों का भी उसने ठेका ले रखा है। इस चर्चित व्यक्ति ने ही पुलिस में भी सभी को पैसा दिया है। यह चर्चाएं आम है। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि इस चर्चित व्यक्ति की शिनाख्त की जा रही है, उस पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। चर्चाएं यह भी है कि हरीपर्वत सर्किल के दो इंस्पेक्टर उसकी गाड़ी में बैठकर घूम रहे हैं। वहीं छत्ता सर्किल के एक थाने का इंचार्ज उसके लिए महंगी शराब की बोतल भेजता है।
विभाग की छवि हुई धूमिल बोले कमिश्नर

चंद पुलिसकर्मियों की वजह से निर्दोष जेल चले गए। इस वजह से विभाग की छवि काफी धूमिल हुई है। यह बात भी पुलिस कमिश्नर ने कही है। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि वह अधिकारियों को हिदायत दे रहे हैं कि आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए।
पुलिस खत्म कराएगी दोनों फर्जी मुकदमे

पुलिस कमिश्नर का कहना है कि जो दोनों मुकदमे दर्ज किए गए हैं उन्हें खत्म करने के लिए पुलिस कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही नशीला पदार्थ और शराब कहां से लाई गई थी। यह भी जानकारी की जाएगी। मामले में अगर पुलिसकर्मियों की ही संलिप्तता मिली तो उन पर एक और मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
पुलिस के डर की वजह से नहीं आया परिवार
पुलिस के डर की वजह से पुलिस अधिकारियों के बुलाने पर भी परिवार काबिज होने के लिए नहीं आ रहा है। अधिकारी परिवारीजनों का इंतजार कर रहे हैं। वह उन्हें विश्वास में ले रहे हैं कि अब उनके साथ कुछ गलत नहीं होगा। जेल गए लोगों का कहना है कि उन्हें पुलिस की वर्दी देखकर ही डर लग रहा है।
थानाध्यक्ष के खिलाफ दर्ज मुकदमे में चार्जशीट लग पाएगी
थानाध्यक्ष सहित अन्य आरोपियों खिलाफ दर्ज मुकदमे में क्या चार्जशीट लग पाएगी। यह देखने के लिए भी सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पूर्व में देखा गया है कि पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में साथी पुलिसकर्मी लीपापोती करते हैं। भाजपा नेता दिनेश कुशवाहा का कहना है कि मामले की जांच सीबीसीआईडी से होनी चाहिए। तभी सही विवेचना हो पाएगी।












