-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। जगदीशपुरा में जमीन वाले मामले में पीड़ित महिला को धमकी मिल रही थी। इस बात की जांच दरोगा शक्ति राठी को मिली थी, लेकिन 100 दिन में भी उन्होंने अपने नाम के अनुरूप प्रार्थना पत्र के निस्तारण में कोई शक्ति नहीं दिखाई। पुलिस अपर आयुक्त कार्यालय से आए प्रार्थना पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। क्या आरोपियों के साथ उनकी भी मिलीभगत थी? इसलिए वह प्रार्थना पत्र को दबाए रहे? यह सवाल खड़े हो रहे हैं। इस दरोगा पर अधिकारी भी कृपा बरसाते रहे हैं। इस बात का उदाहरण यह है कि बड़ी लापरवाही सामने आने पर भी उसे निलंबित नहीं किया गया। एक व्यक्ति जो शाहगंज थाने की हवालात में बंद था उसे दरोगा ने अपने यहां से फरार दिखाया। फिर भी उसे निलंबित नहीं किया गया। महिला को मिली धमकी के मामले में 100 दिन में भी रिपोर्ट नहीं देने पर उसे निलंबित नहीं किया जा रहा है। अलीगढ़ में वह शराब कांड में भी निलंबित हो चुके हैं।
रवि कुशवाहा की पत्नी पूनम ने रवि के जेल जाने के बाद पुलिस अपर आयुक्त के यहां एक प्रार्थना पत्र दिया था। उसमें कहा था कि एक बड़ी गाड़ी में दो लोग उनके घर पर आए और धमकी दी कि तुमसे मना किया था, थाने मत जाना। लेकिन तुम मान नहीं रही हो। तेरे लिए कुछ और ही सोचना पड़ेगा। इस शिकायती प्रार्थना पत्र को पुलिस अपर आयुक्त कार्यालय ने 4 अक्टूबर 2023 को जगदीशपुरा थानाध्यक्ष के लिए भेज दिया था। यह प्रार्थना पत्र जांच दरोगा शक्ति राठी को मिला। शक्ति राठी ने आज तक मामले में रिपोर्ट नहीं दी है। उन्होंने पूनम से संपर्क भी नहीं किया। वह धमकी देने वालों के हौसले बढ़ाते रहे। इससे पीड़ित परिवार दहशत में आता रहा। दरोगा शक्ति राठी की बात करें तो वह 2015 बैच के हैं। वह कितने काबिल हैं इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जो व्यक्ति पहले से ही जेल में बंद था उसे वह जगदीशपुरा में एक मामले में फरार दिखा रहे हैं। कह रहे हैं कि जब घर में दबिश दी गई तो वह भाग गया। जेल में बंद व्यक्ति आखिर कैसे भाग गया यह सवाल उठ रहे हैं।
अलीगढ़ में जहरीली शराब के सेवन में 106 लोगों की मौत के लिए 26 अफसर और कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया था। इसमें शक्ति राठी भी शामिल थे। उस समय वह चौकी प्रभारी जट्टारी थे। वहां से निलंबित होने के बाद वह आगरा आ गए। यहां पर सबसे पहले उन्हें मुड़ी चौकी प्रभारी बनाया गया। इसके बाद कुछ दिन लाल कुर्ती पर रहे और फिर सेक्टर 4 चौकी पर प्रभारी बना दिया गया। मामले में पुलिस कमिश्नर डॉक्टर प्रीतिंदर सिंह का कहना है कि दरोगा ने प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की इसके लिए इसके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी।
यह सवाल उठ रहे
– क्या दरोगा ने जानबूझकर किसी के कहने पर प्रार्थना पत्र दबाया था
-100 दिन तक दरोगा का जमीर क्यों नहीं जागा। धमकी देने वालों की रिपोर्ट उसने पुलिस अपर आयुक्त कार्यालय को क्यों नहीं भेजी।
– रिपोर्ट नहीं भेजने पर दरोगा को निलंबित क्यों नहीं किया गया
– शाहगंज थाने में बंद व्यक्ति को जगदीशपुरा से फरार दिखने में भी उस पर कृपा क्यों बरसाई गई, उसे निलंबित क्यों नहीं किया गया।
– विभाग में आखिर वह किस अधिकारी का चहेता है











