आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति, कुलसचिव सहित कार्य परिषद के सभी सदस्यों और कई अधिकारियों के खिलाफ अधिवक्ता के द्वारा मानहानि को लेकर याचिका डाली गई है। गुरुवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका को परिवाद के रूप में दाखिल कर लिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी को एक अगस्त को तलब किया है। इससे पूर्व भी कुलपति सहित कार्य परिषद के सभी सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज बनाने, फाइलों को गायब करने आदि के मामले में भी अधिवक्ता अरुण कुमार दीक्षित की याचिका पर परिवाद दर्ज कर सभी को तलब किया जा चुका है।
अधिवक्ता डॉक्टर अरुण कुमार दीक्षित ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में मानहानि को लेकर एक याचिका डाली है। याचिका में उन्होंने कहा है कि कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, कुलसचिव अजय मिश्रा और परीक्षा नियंत्रक ओमप्रकाश के द्वारा कूटरचित दस्तावेज बनाकर, झूठे तथ्य प्रस्तुत कर, षड्यंत्र के तहत पत्रकार वार्ता कर सार्वजनिक बयान देकर उनकी प्रतिष्ठा को समाज में धूमिल किया गया है। इससे उनकी सार्वजनिक मानहानि हुई और प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा। उन्होंने कहा है कि वह लंबे समय से वकालत के पेशे से जुड़े हैं। कई पुरस्कारों से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। मानवाधिकार क्षेत्र में उनका अहम योगदान है। उनके द्वारा मानवाधिकार पर लिखी गई किताब ‘अंबेडकर और मानवा अधिकार’ की भारतवर्ष में काफी सराहना हुई है। उनके कई लेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। वह कई केंद्रीय और स्टेट गवर्नमेंट के पैनल में अधिवक्ता हैं। विश्वविद्यालय के पक्ष में भी उन्होंने वादों में शत प्रतिशत निर्णय कराए हैं और अरबों रुपए का लाभ पहुंचाया है। उनके बिलों के लिए उनसे 30% कमीशन मांगे जाने पर उन्होंने राजभवन और प्रधानमंत्री से शिकायत कर दी थी। इसके बाद उनके कार्यों पर रोक लगा दी गई। कूटरचित दस्तावेज बनाकर झूठे तथ्य प्रस्तुत करके कुलपति प्रो. आशु रानी, कुलसचिव अजय मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर ओम प्रकाश व अन्य लोगों ने उनकी छवि को धूमिल किया है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि 13 जून को कुलपति ने पत्रकार वार्ता में सार्वजनिक रूप से उनके लिए अपमानजनक एवं मानहानिकारक बयान दिए। प्रतिवादियों ने गुमराह करते हुए समाचार पत्रों में यह प्रकाशित कराया गया की कार्य परिषद की बैठक में अधिवक्ता डॉ. अरुण दीक्षित की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज विष्णु गुप्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। 13 जून को पत्रकार वार्ता में कुलपति प्रोफेसर आशुरानी ने कहा कि हाई कोर्ट के सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में जांच की गई। जांच रिपोर्ट में पाया गया की शिकायत पूरी तरह भ्रामक और विवि की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। अधिवक्ता डॉक्टर दीक्षित ने अपनी याचिका में कहा है कि सबसे बड़ी बात तो यह है कि तीन दिन के अंदर हाई कोर्ट के सेवानिवृत जज व तीन अन्य सदस्यों की जांच कमेटी भी बन गई और जांच रिपोर्ट भी आ गई। इसके अलावा प्रतिवादीगणों द्वारा पत्रकार वार्ता कर उनके खिलाफ सार्वजनिक बयान भी दे दिया गया। यह सब एक षड्यंत्र के तहत हुआ है। इससे उनकी सार्वजनिक मानहानि हुई है और समाज में स्थापित ख्याति को नीचे गिराया गया है। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि व्हाट्सएप ग्रुपों पर जैसे रियल मीडियामेन और डॉक्टर भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय कर्मचारी आदि ग्रुप पर उन्हें लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गईं, जिससे उन्हें सार्वजनिक मानहानि हुई और उनकी प्रतिष्ठा को भी आघात पहुंचा। इससे उन्हें आर्थिक हानि उठानी पड़ी है। अधिवक्ता डॉक्टर दीक्षित के द्वारा अपनी याचिका में कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर ओमप्रकाश, कुलसचिव अजय मिश्रा, प्रोफेसर राजीव वर्मा, उप कुलसचिव पवन कुमार, आईईटी के निदेशक प्रोफेसर मनु प्रताप सिंह, गणित विभाग के प्रोफेसर संजय चौधरी, 6 जून को हुई कार्य परिषद की बैठक में शामिल सभी सदस्यों, वरिष्ठ सहायक राधिका प्रसाद को आरोपी बनाया गया है।










