आगरा। शनिवार रात को एसटीएफ के द्वारा नकली दवा के सिंडिकेट का पर्दाफाश किया गया है। सिंडिकेट के द्वारा कई सालों से बाजार में नकली दवा बेचकर अरबों रुपए कमाए गए हैं। एसटीएफ की कार्रवाई को रोकने के लिए एक करोड रुपए की पेशकश भी की गई। चंद मिनट में यह पैसे भी आ गए। एसटीएफ के द्वारा पैसे सहित सिंडिकेट के लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में चार मुकदमे दर्ज होंगे। एसटीएफ को इसकी विवेचना मिल सकती है।
सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि मुख्यालय में जाइडस, ग्लेनमार्क, सन फार्मा, सनोफी सहित आधा दर्जन दवा कंपनियों ने नकली दवा की बिक्री की शिकायत की थी। दो महीने से एसटीएफ जांच में जुटी हुई थी। एसटीएफ ने बाहर से कई टीम बुलाकर शुक्रवार को इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा के नेतृत्व में फव्वारा दवा बाजार में मुबारक महल स्थित हेमा मेडिको एजेंसी और गोगिया मार्केट स्थित बंसल मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा गया। दोनों थोक की दुकान और दोनों के गोदाम सील कर दिए गए। दोपहर में कारोबारी हिमांशु अग्रवाल बैग में 500- 500 रुपये की नोट की गड्डी रखकर औषधि विभाग और एसटीएफ के अधिकारियों को देने के लिए फव्वारा दवा बाजार पहुंचे। टीम ने एक करोड़ की रिश्वत के साथ उसे गिरफ्तार कर लिया। नोटों की गिनती करने के लिए मशीन मंगाई गई। इसके बाद टीम हिमांशु अग्रवाल को लेकर उसकी फर्म पर पहुंची। दवा कंपनियों के प्रतिनिधि भी बुला लिए गए। दवाओं के क्यूआर कोड स्कैन करने के साथ रेपर के प्रिंट की जांच कराई गई। टीम ने देर रात तक सर्दी जुकाम, बुखार, दर्द निवारक दवाएं, चर्म रोग की दवाओं सहित ढ़ाई करोड़ की दवाएं जब्त कर लीं, नकली दवाओं के 214 कार्टन से एक डीसीएम भर गई।
कई वर्षों से चल रहा नकली दवा की बिक्री का खेल
पहले टैक्स चोरी की दवा आस पास के जिलों से मंगाकर बिक्री करने की आशंका पर जांच की गई। इसमें सामने आया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की फैक्ट्री में ब्रांडेड कंपनियों की नकली दवा सस्ती दर पर तैयार कराई जा रहीं हैं, 10 रुपये की दवा तैयार कर 100 रुपये में बेची जा रही थी। दवाएं बिल से बिक्री की जातीं थीं। इन दवाओं को लोग बिल से मेडिकल स्टोर से खरीद कर खा रहे थे।
दवा का नहीं होता है असर, बदलनी पड़ रहीं दवाएं
फिजिशियन डॉ. डीपी शर्मा ने बताया कि कई बार मरीज की तबीयत में दवा लेने के बाद भी सुधार नहीं होता है तो दूसरी कंपनी की वही दवा लिख दी जाती है, इससे तबीयत में सुधार हो जाता है। ऐसा नकली दवा के कारण होता है, नकली दवा की गुणवत्ता खराब होती है इसलिए उसका असर नहीं पड़ता है।












