आगरा। पुलिस दबिश के दौरान सिकंदरा में हुई अधिवक्ता की मौत के मामले में 30 दिन बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इधर मुकदमा दर्ज होने के बाद गुपचुप तरीके से गायब हुए पुलिसकर्मियों ने भी अपनी वापसी करा ली है। धीरे से उन्हें ताज सुरक्षा से सम्बद्ध भी कर दिया गया है। इनकी वापसी की थाने में भी कई पुलिसकर्मियों को कानों-कान खबर नहीं लगी है।
अधिवक्ता सुनील शर्मा मंगलम आधार अपार्टमेंट में आठवीं मंजिल पर रहते थे। उनके खिलाफ न्यू आगरा थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज था। बिना कोर्ट से गैर जमानती वारंट लिए पुलिस ने एक मार्च की रात उनके घर दबिश दी थी। पुलिस दरवाजा तोड़कर उनके घर में घुसी थी। दबिश का वीडियो भी वायरल हुआ है। इधर दबिश के दौरान संदिग्ध हालात में अधिवक्ता सुनील शर्मा ऊपर से नीचे गिरे थे। अभी तक पुलिस यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि अधिवक्ता किस फ्लैट से गिरे थे। पत्नी का तो आरोप है पुलिसकर्मियों ने उन्हें फेंका था। तहरीर पर तत्कालीन एसओ न्यू आगरा राजीव कुमार और एसआई अनुराग सिंह निलंबित हुए थे। दोनों को हत्या के मुकदमे में नामजद किया गया था। मुकदमे में आठ से दस पुलिस कर्मियों का भी जिक्र था। यह सभी गुपचुप तरीके से गायब हो गए थे। बाद में छुट्टी लेते रहे। इधर फोरेंसिक टीम से क्राइम सीन का दोहराव कराया गया था। घटना के बाद अधिवक्ताओं ने कई दिन तक विरोध प्रदर्शन किया था। अधिवक्ताओं ने तीन मांगे रखी थीं। अधिवक्ता की पत्नी को एक करोड़ का मुआवजा मिले। मुकदमे की विवेचना किसी दूसरी जांच एजेंसी से कराई जाए। जब तक विवेचना ट्रांसफर नहीं होती जांच एसआईटी के निर्देशन में चले। एसआईटी तो बन गई थी। लेकिन अभी तक कार्रवाई शून्य है। एक महीने बाद भी दबिश में गई टीम के नाम केस डायरी में नहीं खोले गए हैं। एक माह में विवेचना के नाम पर सिर्फ खानापूरी हुई है। घटना के बाद दबिश में गए पुलिसकर्मियों ने हाल ही में वापसी करा ली है। उन्हें ताज सुरक्षा से संबद्ध कर दिया गया है।










