आगरा। जगदीशपुरा में दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर पांच निर्दोष लोगों को जेल भेजकर करोड़ों की जमीन पर कब्जे के मामले में फरार बिल्डर, उसके पुत्र और पुरुषोत्तम पहलवान को पुलिस 12 दिन में भी नहीं पकड़ सकी है। इधर कोर्ट ने तीनों के गैर जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। इन पर डीसीपी सिटी की ओर से 10-10 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया गया है।
बोदला में बैनारा फैक्ट्री के पास दस हजार गज जमीन पर कब्जा कराया गया। जमीन की कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर बिल्डर कमल चौधरी, धीरू चौधरी, एसओ जितेंद्र कुमार सहित 18 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने सबसे पहले अमित अग्रवाल को जेल भेजा था। उसके बाद एसओ जितेंद्र कुमार को जेल भेजा गया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद भी रहस्यों से पर्दा नहीं उठा। पूरा ठीकरा पुरुषोत्तम पहलवान पर फोड़ दिया गया है। विवेचक ने आरोपियों के गैर जमानती वारंट के लिए डकैती कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। पत्रावली के अवलोकन के बाद कोर्ट ने बिल्डर उनके बेटे और पुरुषोत्तम पहलवान के गैर जमानती वारंट जारी किए हैं। तीनों की गिरफ्तारी में पुलिस फेल दिखाई दे रही है। बिल्डर के पुलिस विभाग में कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं। यह बात भी सुर्खियों में छाई हुई है।
एसआईटी की जांच कछुआ गति से चल रही
मामले में एक एसआईटी गठित की गई थी लेकिन उसकी जांच कछुआ गति से चल रही है। एसआईटी जांच में एक भी राज ऐसा नहीं खुला है जिसकी लोगों को पहले से जानकारी नहीं थी। एसआईटी की जांच में वे ठेकेदार अभी तक बचे हुए हैं जो पुलिस से कोई भी काम कराने के ठेके लिया करते थे। जमीन के इस खेल में भी ऐसे ही ठेकेदारों की भूमिका है। एसआईटी की जांच में क्या हर चेहरा बेनकाब होगा। यह सवाल उठने लगा है। कुछ लोग तो सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।
मुकदमा लिखे 12 दिन बीत चुके हैं। थाने से क्या अकेले एसओ पूरा खेल खेल रहे थे। यह सवाल पहले दिन से उठ रहा है। उनके साथ साजिश में शामिल पुलिस कर्मियों को अभी तक आरोपित नहीं बनाया गया है। एनडीपीएस का मुकदमा फर्जी है। अधिकारी भी यह मान चुके हैं। इसलिए उस मुकदमे को खत्म करने की बात चल रही है। जिस दरोगा ने मौके पर दबिश देकर एनडीपीएस बरामद किया उसकी भूमिका पर सवाल क्यों नहीं उठ रहे हैं। दरोगा घटना में दोषी नहीं है तो अभी तक अधिकारियों के समक्ष उपस्थित होकर अपने बयान देने क्यों नहीं आया है। बयान के लिए उसे एसआईटी ने अभी तक नोटिस तक जारी नहीं किया है। यह स्थिति तब है जब मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में है।










