आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय नकल में पकड़े गए कॉलेजों को डिबार किए बिना द्वितीय सेमेस्टर के लिए केंद्रों की सूची बना रहा था। औटा पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय में जाकर हंगामा कर दिया। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय ने 13 कॉलेजों के डिबार होने की सूची जारी की है। हैरानी की बात यह है कि मैनपुरी जैसे नकल के गढ़ में एक भी कॉलेज नकल में दोषी नहीं पाया गया है। आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद में सिर्फ 13 कॉलेज ही नकल में दोषी पाए गए हैं, जबकि विश्वविद्यालय ने नकल पकड़ने के लिए जिन वाहनों से उड़नदस्ते भेजे थे, उन वाहनों के नाम पर लाखों रुपए खर्च हुए हैं। सवाल खड़े हो रहे हैं कि लाखों रुपए का तेल फूंकने के बाद विश्वविद्यालय सिर्फ 13 कॉलेजों को ही पकड़ पाया है।
13 अगस्त से विश्वविद्यालय की द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं हैं। परीक्षाओं के लिए केंद्र बनाए जा रहे हैं। इस बार भी औटा को केंद्र बनाने के मामले में बाहर रखा गया है। औटा के महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा आज विश्वविद्यालय में पहुंचे और परीक्षा नियंत्रक को एक पत्र दिया। उन्होंने पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय ने प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाओं में कितने कॉलेजों में नकल पकड़ी और कितने कॉलेजों को डिबार किया। वहीं सीसीटीवी कंट्रोल रूम की रिपोर्ट क्या थी? महामंत्री के द्वारा इस पत्र के देने के बाद परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश सिंह के द्वारा 13 कॉलेज के डिबार होने की सूची जारी की गई। इसमें आगरा के सिर्फ दो, मथुरा के चार और फिरोजाबाद के 7 कॉलेज हैं। कुल मिलाकर 13 कॉलेज ही डिबार किए गए हैं। दूसरी ओर औटा महामंत्री की ओर से कंट्रोल रूम की रिपोर्ट के बारे में भी पूछा गया था। महामंत्री को इस बात की जानकारी हुई थी कि प्रोफेसर वीके सारस्वत ने कई कॉलेजों में कैमरा नहीं चलने को लेकर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट को लेकर महामंत्री शासन में शिकायत ना कर दें। इसलिए विश्वविद्यालय ने 69 कॉलेजों की भी सूची जारी की है। इन कॉलेजों में कैमरे नहीं चलने की बात कही गई है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश का कहना है कि इन कॉलेजों को भी परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा










