-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। गुरुवार को हरीपर्वत थाने में सभी की आंखें उसे समय नम थीं जब भूरा उन्हें छोड़कर चला गया था। वह बेशक इंसान के जन्म में नहीं था, लेकिन छाप ऐसी छोड़कर गया है कि उसे आने वाले समय में हर कोई याद रखेगा।
बता दें कि थाना हरीपर्वत में 16 साल से एक श्वान तैनात था। उसका नाम भूरा था। वह बचपन से लेकर मृत्यु तक थाने में ही रहा। भूरा को हरीपर्वत थाने का डॉग स्क्वायड भी कहा जाता था। बेशक उसने पुलिस की ट्रेनिंग नहीं ली थी लेकिन सभी उसे पुलिसकर्मी ही मानते थे। भूरा की सबसे खास बात यह थी कि वह रात में हवालात के बाहर और दिन में गेट के बाहर ही बैठता था। दो बार ऐसा हुआ कि कुछ अपराधियों ने हवालात से भागने की कोशिश की। भूरा ने उन पर हमला कर उन्हें पकड़ लिया था। भूरा के कारनामों को लेकर DLA समाचार पत्र में 21 मई 2019 को इसी संवाददाता ने खबर भी प्रकाशित की थी। इसके बाद उसके कारनामे अधिकारियों तक पहुंचे थे। तत्कालीन एएसपी गोपाल चौधरी ने उसके पास पहुंचकर उसकी जानकारी ली थी। पूर्व में थाने में तैनात रहे इंस्पेक्टर अरविंद कुमार बताते हैं कि अगर भूरा से कोई भी पुलिसकर्मी ऊंची आवाज में बात करता था तो वह नाराज हो जाता था। भूरा को पुलिसकर्मी सुबह और शाम पनीर खिलाते थे। कुछ महीने पहले हरीपर्वत थाने का जब उद्घाटन हुआ तो भूरा के लिए ड्रेस भी सिलवाई गई थी। सभी पुलिसकर्मी उसे पुलिस परिवार का सदस्य समझते थे। बताया जा रहा है कि चौराहे पर किसी वाहन ने भूरा को टक्कर मार दी थी। इसके बाद वह घायल अवस्था में थाने आया और उसने दम तोड़ दिया। इंस्पेक्टर देवेंद्र दुबे, एसआई निशामक त्यागी सहित सभी पुलिसकर्मी शोक की लहर में डूब गए। पालीवाल पार्क में भूरा का अंतिम संस्कार किया गया। कार चालक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
एक बार न्यू आगरा और एक बार सिकंदरा छुड़वा दिया था
पुलिस कर्मी बताते हैं कि एक बार एक ऐसे इंस्पेक्टर आए जो भूरा को थाने में देखकर नाराज हो गए थे। उन्होंने उसे न्यू आगरा थाना क्षेत्र में छुड़वा दिया था। कुछ घंटे बाद ही वह वहां से हरीपर्वत थाने में आ गया। इसके बाद एक इंस्पेक्टर और आए थे उन्होंने उसे सिकंदरा क्षेत्र में छुड़वा दिया था लेकिन भूरा कुछ घंटे बाद ही लौटकर फिर से हरीपर्वत थाने में आ गया था। एक बार इंस्पेक्टर प्रवीण मान ने पुलिस कर्मियों से कहा कि इसे यहां से भगाओ। यह यहां क्यों रहता है। इस पर पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा था कि साहब इससे कुछ मत कहना। यह भी यहां का स्टाफ है।












