आगरा। इंस्पेक्टर साहब मैं तो बर्बाद हो गई। मेरे पैसे और आभूषण गुम हो गए। घरवाले मुझे ताना दे देकर मार डालेंगे। कैसे भी मेरे पैसे और जेवर ढूंढ दीजिए। आपका एहसान जीवन भर नहीं भूलूंगी। यह पीड़ा एक महिला के द्वारा नम आंखों से इंस्पेक्टर एत्माउद्दौला देवेंद्र दुबे को बताई गई। महिला को परेशान होता देखकर उन्होंने कहा आप परेशान मत होइए। पूरी बात विस्तार से बताइए। महिला ने बताया वह एक ऑटो में अपना बैग भूल गई है उसमें आभूषण और कैश रखा हुआ था। इंस्पेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ऑटो को खोजना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में ऑटो खोज निकाला। जैसे ही इंस्पेक्टर ने महिला को बैग वापस किया महिला के आंखों में से आंसू बंद होने का नाम नहीं ले रहे थे। महिला बोली आपने मुझे बचा लिया। इंस्पेक्टर बोले यह तो हमारा काम है। सरकार सैलरी ही आप लोगों के लिए दे रही है।
प्रियंका पत्नी मनोज कुमार निवासी एटा शान्तिवेद हॉस्पिटल से रामबाग के लिए ऑटो में बैठी थीं। उनके पास में एक बैग था जिसमें दो अंगूठी, एक मंगलसूत्र व 20 हजार रुपये रखे थे। महिला ऑटो में ही उसे भूल गई। जब वह रामबाग उतरी तो उसने देखा ऑटो चला गया था। इसके बाद वह रोते हुए थाने पहुंची। इंस्पेक्टर ने उसे परेशान देखकर पानी पिलाया और पूरी बात पूछी। महिला ने बताया आभूषण और 20 हजार रुपये बैग में रखे थे जो की ऑटो में चला गया है। इंस्पेक्टर देवेंद्र दुबे ने ऑटो खोजने के लिए तत्काल तीन टीम गठित कर दीं। ऑटो का नंबर चिन्हित कर लिया गया। कुछ ही देर में उसे खोज भी लिया गया। पूछताछ में ऑटो चालक संजय ने बताया कि महिला का बैग इसमें रह गया था। इसके बाद पुलिस ने उससे वह ले लिया। इंस्पेक्टर ने बैग खोल कर देखा तो उसमें 40 हजार रुपये रखे थे जबकि महिला ने 20 हजार रुपये बताए थे। इस बात पर महिला ने बताया वह इतनी घबरा गई थी कि भूल ही गई थी कि 40 हजार रुपये रखे थे। इसके बाद इंस्पेक्टर ने बैग को महिला के जैसे ही हवाले किया महिला की आंखों में खुशी के आंसू झलक उठे।










