आगरा। सिकंदरा इंडस्ट्रीयल एरिया में चार महीने से नकली और नशीली दवा की फैक्ट्री चलने के मामले में पुलिस और एलआईयू का भी नेटवर्क फेल रहा है। इधर एएनटीएफ का गठन नशे की तस्करी पर अंकुश के लिए हुआ था। आगरा यूनिट का कार्यालय बाईंपुर, सिकंदरा में है। कार्यालय से महज छह किलोमीटर दूर चार महीने से फैक्ट्री चल रही थी। करोड़ों रुपए की दवाएं उसने कई जिलों में खपा दीं। ना जाने कितने लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ होगा। लेकिन महीनेदारी के चलते यह फैक्ट्री पकड़ी नहीं गई। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि जेल से रिहा अपराधी पर नजर रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
इंडस्ट्रियल एरिया में पकड़ी गई नकली दवा बनाने की फैक्ट्री में दवा माफिया विजय गोयल सहित दस लोगों को जेल भेजा गया है। आठ करोड़ से अधिक की बरामदगी हुई है। सवाल यह उठ रहा है कि दवा माफिया विजय गोयल ने अपने बयान में लाखों की महीनेदारी की जो बात बताई उस बयान पर क्या कार्रवाई होगी। दवा माफिया ने यह भी बताया है कि दवा फैक्ट्री के लिए गांजा तस्कर ने फाइनेंस किया। चर्चाएं यह भी हैं कि जब फैक्ट्री पकड़ी गई थी तो दवा माफिया ने कहा था कि मेरी उन साहब से बात कराओ। यह साहब सुर्खियों में छाए हुए हैं।











