आगरा। अछनेरा पुलिस की एक कोल्ड स्टोरेज स्वामी ने बात नहीं मानी। इसलिए एक ट्रक आलू सड़ गए हैं। कच्चा माल छोड़ने के लिए पूर्व मंत्री से उन्होंने थानाध्यक्ष को फोन कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अधिकारियों से शिकायत की फिर भी थाना पुलिस ने कच्चा माल नहीं छोड़ा।
कमला नगर निवासी संजीव गर्ग ने बताया कि टूंडला में उनका शीतगृह है। नौ सितंबर को कोल्ड से आलू लेकर एक ट्रक जा रहा था। दक्षिणी बाईपास के निकट अछनेरा क्षेत्र में दूध के टैंकर ने पीछे से ट्रक में टक्कर मार दी। हादसे में टैंकर के क्लीनर की मौत हो गई। पुलिस ने ट्रक को पकड़ लिया। दस सितंबर को वह अछनेरा थाने गए। पुलिस से संपर्क किया। कहा कि ट्रक में आलू लदे हैं। ट्रक उनका नहीं। उसका मालिक मुकदमा लड़ेगा। आलू कच्चा माल है। पुलिस ने टैंकर का दूध ले जाने दिया था। उन्होंने कहा कि आलू भी दूसरी गाड़ी में पलटवा दें। आलू सड़ जाएंगे। पुलिस ने चार दिन उन्हें टहलाया। बाद में उसने सुविधा शुल्क की मांग की गई। उन्होंने पुलिस की बात नहीं मानी। एक पूर्व मंत्री से थाने फोन कराया। पुलिस ने पूर्व मंत्री से कहा थाने भेज दीजिए कर देंगे। वह थाने गए। उनसे कहा गया कि नेतागिरी करा ले, कुछ नहीं होगा।
संजीव गर्ग ने बताया कि वह पिछले 25 साल से कारोबार कर रहे हैं। पूरे भारत में उनका माल जाता है। गाड़ियों के हादसे भी होते हैं। पुलिस बिना किसी सिफारिश के कच्चा माल ले जाने देती है। गाड़ी बंद रहती है। किसी बस से एक्सीडेंट हो जाए तो पुलिस कभी सवारियों को थाने में बंद नहीं रखती। आरोपित ट्रक का चालक है। आलू का कोई कसूर नहीं। अछनेरा थाने जैसी पुलिस पूरे भारत में कहीं नहीं है। उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों तक से शिकायत की। एक माह पहले एसीपी सैंया की पेशी से फोन आया था। उनके बयान दर्ज किए गए। अभी तक जांच भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। ट्रक में आलू सड़ चुका है। दुर्गंध से आस-पास के लोग परेशान हैं। अधिवक्ता शफीक कुरेशी का कहना है कि किसी गाड़ी से हादसा हो जाए तो उसमें लदा कच्चा माल पुलिस छोड़ देती है। इसके लिए कोर्ट से आदेश कराने की जरूरत नहीं होती। कोल्ड स्टोरेज स्वामी इस मामले में पुलिस को पार्टी बना सकते हैं। आलू सड़ना थाना पुलिस की कार्यप्रणाली दर्शाता है।











