आगरा। आगरा पुलिस पैसे के लालच में एक के बाद एक कांड कर रही है। जिसके बाद कमिश्नरेट की छवि काफी खराब हो रही है। कभी पुलिस जुआ लूट लेती है, कभी छेड़छाड़ के आरोपी को छोड़ देती है तो कभी चोरों के गैंग को ही। इस बार तो हदें ही पार हो गईं। वसूली और कारखासी के चलते पर्यटन थाने से लाइन हाजिर हो चुके तीन सिपाहियों ने 60 विदेशियों के प्रतिनिधि मंडल को वीआईपी तरीके से ताजमहल ही घूमा डाला। विभाग में चर्चाएं हैं कि प्रतिनिधि मंडल घूमाने के लिए उन्होंने मोटा पैसा वसूला। इसमें पर्यटन थाने के जिम्मेदार को भी पैसा दिया गया। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच शुरू होने के बाद खलबली मच गई है।
नवंबर में पर्यटन थाने में तैनात सिपाही दीपक मान, वेदांत, हिमांशु को लाइन हाजिर किया गया था। तीनों के खिलाफ डीसीपी को गोपनीय रूप से शिकायतें मिल रही थीं कि तीनों ही अवैध तरीके से वसूली करते हैं। कारखासी करते हैं। एसीपी ताज सुरक्षा की रिपोर्ट पर तीनों को लाइन हाजिर किया गया था। जब से यह लाइन में ही हैं। फिर भी तीनों सिपाहियों का मन ताजमहल, आगरा किला के आस-पास ही भटक रहा है। मंगलवार को अधिकारियों को पता चला कि सुबह-सुबह 6:00 बजे 60 विदेशियों का प्रतिनिधिमंडल आया था। उन्हें ताजमहल घूमाने के लिए लाइन हाजिर किए गए सिपाही आए थे। दो सिपाही पर्यटन थाने के भी उनके साथ थे। लाइन हाजिर सिपाही किसके आदेश पर विदेशियों को लेकर ताजमहल पहुंचे? यह सवाल उठा। डीसीपी द्वारा प्रतिसार निरीक्षक से जानकारी की गई तो उन्हें भी सिपाहियों के बिना अनुमति जाने की जानकारी नहीं थी। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। गुपचुप पूरे प्रकरण की जांच एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद को दी। एसीपी ने थानाध्यक्ष प्रीति चौधरी से जवाब तलब किया है। कई पहलुओं से जांच चल रही है। सबसे पहला सवाल यही है कि लाइन हाजिर सिपाहियों को विदेशियों के आने की जानकारी किससे मिली थी। सिपाहियों ने विदेशियों को ताजमहल घुमाने के लिए अपनी नौकरी क्यों फंसाई। आखिर उन्हें क्या लालच था। यह पहला मामला नहीं है जब पर्यटन थाना पुलिस पर कोई आरोप लगा है। पूर्व में भी पर्यटन थाना पुलिस विवादों में रही है। पूर्व में एक थाना प्रभारी की वीआईपी सेल में सेटिंग थी। कोई भी विदेशी प्रतिनिधि मंडल आता था घुमाने की जिम्मेदार उनके पास रहती थी। छब्बी के आरोप लगे थे। गोपनीय रूप से जांच हुई थी। मामला लखनऊ तक पहुंचा था। एक मामले में तो गुपचुप तरीके से छब्बी की रकम वापस कराई गई थी। बताया जा रहा है कि ट्रैवलर के माध्यम से प्रतिनिधिमंडल को घुमाने का मोटा पैसा मिलता है। इसके साथ ही विदेशी पर्यटक जो सामान खरीदते हैं उसमें भी पुलिस वालों का कमीशन होता है। चर्चाएं यह भी हैं कि तीनों सिपाही सुबह प्रतिनिधि मंडल को घुमाने के बाद थाने में एक जिम्मेदार से भी मिले थे। जिम्मेदार से क्यों मिले थे और उन्हें क्या दिया था, यह जानने के लिए प्रयास जारी हैं।











