आगरा। आज विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस है। इस पर आरबीएस कॉलेज की प्रोफेसर पूनम तिवारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति ने हम सबके समक्ष एक चुनौती खड़ी कर दी है। आंकड़े बताते हैं कि विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या से जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो पौने दो लाख लोगों ने 2021 में आत्महत्या की।
आत्महत्या रूपी दानव किस प्रकार से मानव जीवन को निगल रहा है। यह हमारे समक्ष आंकड़े हैं। भारत में रोजाना 450 लोग विभिन्न तरीकों को अपनाकर अप्राकृतिक मृत्यु का वरण कर रहे हैं। आत्महत्या करने वालों में सर्वाधिक युवा, प्रौढ़ एवं महिलाएं हैं। प्रोफेसर पूनम तिवारी का कहना है अगर हम जागरूक रहें तो व्यक्ति को समय रहते बचाया जा सकता है। प्रोफेसर पूनम तिवारी का कहना है कि आत्महत्या एक प्रकार की मानसिक विकृति है। इसका कारण डिप्रेशन या नशाखोरी को माना जाता रहा है। अधिकांश आत्महत्या विभिन्न कारणों से उत्पन्न मानसिका आवेशों का ही प्रतिफल होती हैं। जैसे किसी प्रकार की हानि होना, अकेलापन, संबंधों का टूटना, आर्थिक समस्याएं, लंबी बीमारी आदि से उत्पन्न जीवन निराशा जो हमारे मन मस्तिष्क पर छा जाती है और हम अपने जीवन को वर्तमान में रखते हैं तो आत्महत्या की ओर कदम बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
इस वैश्विक संकट, जो मानव जीवन के समक्ष चुनौती बनकर खड़ा है, की ओर ध्यान खींचने को डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रत्येक वर्ष 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य है कि मानव जीवन के लिए उत्पन्न संकट के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे, जिसमें पारिवारिक सदस्य, सह कर्मचारी, धर्माधिकारी, चिकित्सक आदि को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। तभी हम आत्महत्या की प्रकृति को बढ़ने से रोक पाएंगे।











