आगरा। दाऊदयाल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन (DDIVE) में “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तर्कशक्ति, अभिव्यक्ति कौशल, राष्ट्र निर्माण की भावना एवं सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करने के उद्देश्य से तीन दिवसीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। अभियान के अंतर्गत “मेरे सपनों का भारत” विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा “विकसित भारत 2047” विषय पर भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गईं।
17 सितंबर को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन “मेरे सपनों का भारत” विषय पर किया गया। विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से विकसित, समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं स्वच्छ भारत की कल्पना को अभिव्यक्त किया। प्रो. शरद चंद्र उपाध्याय एवं प्रो. बी. एस. शर्मा, डीन, छात्र कल्याण ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन निशांत चौहान एवं डॉ. निधि यादव द्वारा किया गया।18 सितंबर को “विकसित भारत 2047” विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित हुई। विद्यार्थियों ने शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक विकास जैसे विषयों पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता का मूल्यांकन प्रो. दिवाकर खरे व डॉ. प्रीति शर्मा द्वारा किया गया, इसमें कार्तिक मुडगल ने प्रथम, अंकिता पाराशर ने द्वितीय तथा भूमिका शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 19 सितंबर को “विकसित भारत 2047” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने विषय के पक्ष एवं विपक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए शिक्षा, रोजगार, तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समावेशन एवं सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने विचार रखे। प्रतियोगिता का मूल्यांकन प्रो. दिवाकर खरे एवं डॉ. प्रीति शर्मा ने किया। इसमें हर्ष यादव ने प्रथम, भूमि अग्रवाल ने द्वितीय तथा वैष्णवी दीक्षित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

“सेवा संकल्प अभियान” के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि राष्ट्र निर्माण केवल विकास के लक्ष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति सेवा, जिम्मेदारी, सहयोग एवं सकारात्मक योगदान की भावना भी इसका महत्वपूर्ण आधार है। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समावेशन, आत्मनिर्भरता एवं युवा सहभागिता को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ा। कुलपति प्रो. आशु रानी ने भी तीनों दिन के कार्यक्रम को सराहा।










