आगरा। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डावर और सचिव केसी जैन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर आगरा के विकास से जुड़े चार बड़े मुद्दे उठाए। इनमें TTZ में उद्योगों पर प्रतिबंध, उत्तरी बाईपास बनने के बावजूद भारी वाहनों का शहर में प्रवेश, यमुना रिवरफ्रंट विकास से पहले नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित करने की जरूरत, और कृष्ण थीम पार्क की परिकल्पना शामिल रही। मुख्यमंत्री ने इन सभी विषयों पर गंभीरता दिखाते हुए अधिकारियों की बैठक बुलाने, आगरा मंडलायुक्त को नोडल अधिकारी बनाने, मामले की समीक्षा कराने और विस्तृत प्रस्ताव मंगाने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा टीटीजेड के लगभग 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना और विस्तार पर लगे प्रतिबंध का रहा। आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष पूरन डावर ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह प्रतिबंध केवल औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर रोजगार सृजन, नए निवेश, स्थानीय उद्यमिता और क्षेत्रीय आर्थिक विकास पर पड़ रहा है। लंबे समय से उद्योग जगत इस विषय को लेकर असमंजस और दबाव की स्थिति में है। पूरन डावर ने मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 8 दिसंबर 2021 को उद्योगों के संबंध में आदेश पारित किया था। इसके साथ ही नीरी द्वारा विभिन्न सेक्टर्स के लिए आवश्यक सेक्टोरियल गाइडलाइंस भी निर्धारित की जा चुकी हैं। इसके बावजूद 14 अक्टूबर 2024 को पुनः प्रतिबंध लागू हो गया। फाउंडेशन का कहना है कि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि न्यायालय के समक्ष उस समय सभी आवश्यक और प्रासंगिक तथ्य प्रभावी रूप से प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं गंभीर रुचि दिखाई और स्पष्ट रूप से पूछा कि इस स्थिति के समाधान के लिए व्यावहारिक रास्ता क्या हो सकता है। इस पर पूरन डावर ने सुझाव दिया कि मामले में प्रभावी और तथ्यात्मक पैरवी कराई जाए ताकि न्यायालय के समक्ष सभी पक्ष मजबूती से रखे जा सकें और पर्यावरणीय संतुलन के साथ औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके। मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आश्वस्त किया कि शीघ्र ही संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाई जाएगी, आगरा मंडलायुक्त को शासन की ओर से नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और वे स्वयं इस विषय से अवगत हैं तथा जल्द ही आगरा आकर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। यह आश्वासन उद्योग जगत के लिए राहत और उम्मीद का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
400 करोड़ का उत्तरी बाईपास बना, फिर भी शहर में घुस रहे भारी वाहन
बैठक में आगरा डेवलपमेंट फाउंडेशन के सचिव एवं अधिवक्ता के.सी. जैन ने शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर विषय उठाया। उन्होंने बताया कि लगभग ₹400 करोड़ की लागत से निर्मित 14 किलोमीटर लंबा उत्तरी बाईपास 04 दिसंबर 2025 से संचालित है, लेकिन इसके बावजूद गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी परिवहन वाहन अब भी शहर के भीतर प्रवेश कर रहे हैं।
दुर्घटना, प्रदूषण और जाम की समस्या बरकरार
केसी जैन ने कहा कि बाईपास बनने का मूल उद्देश्य ही यह था कि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम हो, लेकिन वर्तमान स्थिति में दुर्घटनाओं की आशंका और घटनाएं बढ़ रही हैं, जनहानि का जोखिम बना हुआ है, वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है और मुख्य मार्गों पर जाम की समस्या बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बाहरी गंतव्य वाले ट्रकों और अन्य भारी वाहनों को अनिवार्य रूप से बाईपास से नहीं भेजा गया, तो करोड़ों की लागत से बनी यह परियोजना अपने उद्देश्य को पूरी तरह प्राप्त नहीं कर पाएगी।
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 115 के तहत अधिसूचना की मांग
केसी जैन ने मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 115 के अंतर्गत अधिसूचना जारी कर गैर-आगरा गंतव्य भारी वाहनों को अनिवार्य रूप से उत्तरी बाईपास पर डायवर्ट करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए प्रकरण का परीक्षण कराने और आवश्यक कार्रवाई पर विचार करने का आश्वासन दिया। यह कदम लागू होता है तो शहर की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण में बड़ा सुधार संभव माना जा रहा है।











