आगरा। कुछ थाना प्रभारियों के द्वारा धोखाधड़ी से संबंधित विवेचना पुराने दरोगाओं से ना कराकर नए दरोगाओं से कराई जा रही हैं। वह उन्हें लटकाए पड़े हैं। इसके पीछे कारण यह है कि किसी को विभाग में आए दो साल हुए हैं तो किसी को एक साल। अभी वह कानून की एबीसीडी सीख रहे हैं और उन्हें इतनी कठिन विवेचना दे दी गई हैं। ऐसे दरोगाओं को आज पुलिस आयुक्त ने कानून का पाठ पढ़ाया कि उन्हें किस प्रकार विवेचना करनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि अगर उन्हें कोई सीनियर सलाह नहीं देता है तो वह सीधे आकर उनसे मिल सकते हैं।
पुलिस आयुक्त के सामने रोजाना भारी संख्या में पीड़ित पहुंच रहे हैं। कुछ पीड़ित वह हैं जिनकी यह शिकायत है कि पुलिस उनकी विवेचना में कार्यवाही नहीं कर रही। ज्यादातर विवेचना धोखाधड़ी से ही संबंधित हैं। गुरुवार शाम को पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने विवेचकों को अपने पास बुलाया। वह भी यह देखकर हैरान हो गए कि विवेचकों को कोई नॉलेज नहीं है और उन्हें थाना प्रभारी के द्वारा धोखाधड़ी की विवेचना दे दी गई है। आईपीसी 420, 467, 468, 471 की विवेचना सबसे कठिन मानी जाती है। इसमें साक्ष्यों का बहुत गहराई से संकलन करना पड़ता है। पुराने दरोगा ही इसे बेहतर तरीके से कर सकते हैं लेकिन कुछ प्रभारियों के द्वारा एक और दो साल पहले ही भर्ती हुए दरोगाओं को यह विवेचना दे दी गई हैं, जबकि वह अभी सिर्फ एनसीआर धारा 323, 504, 506 की विवेचना कर सकते हैं। बुधवार शाम को पुलिस आयुक्त ने विवेचकों से सवाल जवाब किए तो कुछ यह भी नहीं बता पाए कि साक्ष्य कैसे एकत्रित करते हैं। पुलिस आयुक्त ने कहा कि पूछने में शर्म नहीं आनी चाहिए, जब भी उन्हें कोई चीज समझ में ना आए वे उनसे पूछने के लिए आ सकते हैं। वही वह यह देखकर भी चिंतित थे कि इतनी गंभीर विवेचना नए दरोगा को दे दी गई हैं।










