आगरा। उत्तर प्रदेश सरकार लगातार महिला संबंधी अपराधों के प्रति गंभीर रहने के लिए निर्देश दे रही है, लेकिन आगरा कमिश्नरेट की जगदीशपुरा थाना पुलिस उन आदेशों को हवा में उड़ाए हुए है। एक नाबालिग किशोरी के गायब होने की घटना को भी पुलिस ने 6 दिन तक गंभीरता से नहीं लिया। परिजनों की आंखों में आंसू देखकर भी मुकदमा दर्ज नहीं किया। किशोरी खुद ही किसी तरीके से आरोपी के चंगुल से छूटकर वापस आई। आने के बाद उसने बताया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है। किशोरी का रो-रो कर बुरा हाल है। मामला सुर्खियों में आने के बाद थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी की गिरफ्तारी की। इधर सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि अगर थानाध्यक्ष समय से मुकदमा दर्ज करते तो किशोरी को बरामद कर दुष्कर्म होने की घटना रोकी जा सकती थी।
क्षेत्र की रहने वाली 15 वर्षीय किशोरी 12 अगस्त को अचानक गायब हो गई। परिजनों के द्वारा इस बात की सूचना थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मामले को बिल्कुल भी गंभीरता से नहीं लिया। परिजन रोजाना थाने के चक्कर काटते रहे लेकिन थानाध्यक्ष से लेकर थाना पुलिस का दिल नहीं पसीजा। 18 अगस्त को किशोरी किसी तरीके से आरोपी के चंगुल से छूटकर घर पर वापस आई, उसने बताया कि उसे एक युवक लव जिहाद का शिकार बनाकर ले गया था, उसके साथ दुष्कर्म भी किया। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने में पहुंचे और कहा कि बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ है। अब तो मुकदमा दर्ज कर लीजिए। तहरीर देने के बाद कई घंटे बाद जगदीशपुरा थाना पुलिस ने मंगलवार को मुकदमा दर्ज किया। मामला सुर्खियों में आने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई है।











