आगरा। पुलिस कमिश्नर हर मीटिंग में यह पाठ पढ़ा रहे हैं कि पीड़ित के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए। एक बार में उसकी एफआईआर दर्ज की जाए। लेकिन आगरा कमिश्नरेट में थाना पुलिस उनके निर्देश को नहीं मान रही। यहां पर सेवानिवृत्त जिला जज के पीड़ित होने पर उनकी एफआईआर दर्ज करने के लिए उन्हें परेशान किया जा रहा है। आगरा पुलिस की इस कार्यप्रणाली की वह डीजीपी और मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे।
सुभाष कुलश्रेष्ठ सरला बाग में रहते हैं। वह जिला जज से सेवानिवृत हुए हैं। आज सुबह 3:30 बजे वह दयालबाग में खेतों पर अपनी कार से जा रहे थे। राधा नगर के पास पीछे से एक कार चालक काफी तेज गति में आ रहा था, उसने उनकी गाड़ी में पीछे से काफी तेजी से टक्कर मार दी। इससे उनकी गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में वह भी बाल बाल बचे। आवाज सुनकर आसपास के लोग भी आ गए। आरोपी गाड़ी चालक शराब के नशे में धुत था। वह भीड़ से बोल रहा था कि मेरा भाई बदमाश है, मुझे यहां से जाने दो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा। सेवानिवृत्त जिला जज और भीड़ उसे पकड़कर थाने ले गई। आरोपी की गाड़ी में से शराब की बोतल भी मिली। गाड़ी की सीट के नीचे कुछ शराब भी फैली हुई थी। लोगों का कहना था कि आरोपी ने इस कदर शराब पी रखी थी कि पेंट में भी पेशाब कर रहा था।

सेवानिवृत्त जिला जज ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। उनका कहना है कि मुंशी ने कहा कि अभी मुकदमा दर्ज नहीं हो पाएगा। इंस्पेक्टर साहब 12:00 के बाद आते हैं। तभी थाने में आना। पीड़ित ने कहा कि यह कौन सा तरीका है कि इंस्पेक्टर साहब के आने के बाद ही मुकदमा दर्ज होगा। आगरा पुलिस तो यह स्लोगन देती है 24 घंटे पुलिस आपके साथ है। क्या वह हवाई है। मेरे साथ घटना हुई है इसलिए अभी इंस्पेक्टर को बुलाया जाए। मुंशी ने कहा इंस्पेक्टर साहब रात में नहीं आते हैं। सुबह 12:00 बजे के बाद ही आते हैं। बताया जा रहा है पीड़ित सेवानिवृत्त जिला जज मुकदमा दर्ज कराने के लिए तीन घंटे थाने में बैठे रहे। कोई सुनवाई नहीं होने और पुलिस का दुर्व्यवहार देखते हुए वह वहां से दुखी होकर चले गए। वह आगरा पुलिस को कोस रहे हैं। वह यहां की पुलिसिंग की शिकायत डीजीपी से करेंगे। इधर मामले की जानकारी के लिए इंस्पेक्टर धर्मेंद्र भाटी को फोन किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।











