आगरा। पिनाहट ब्लॉक क्षेत्र के गांव अतैयापुरा में रेबीज के टीके लगने के बावजूद पांच वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न है।
नौ जनवरी को छोटू घर के बाहर खेल रहा था, तभी एक आवारा कुत्ते ने उसके चेहरे पर काट लिया। परिजन उसे तत्काल पिनाहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाया गया। परिजनों का कहना है कि बच्चे को 9, 12 और 16 जनवरी को रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए थे। अगली खुराक की तारीख 7 फरवरी तय की गई थी। इसके बावजूद शनिवार को अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। घबराए परिजन उसे इलाज के लिए दिल्ली ले गए, जहां चिकित्सकों ने उपचार किया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रविवार सुबह बालक की मौत हो गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमानुसार रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए थे, तो फिर बच्चे की जान क्यों नहीं बच सकी। क्या इंजेक्शन की गुणवत्ता में कोई कमी थी? क्या इंजेक्शन को सही तापमान पर संरक्षित किया गया था? क्या काटे जाने के स्थान की गंभीरता के अनुसार अतिरिक्त उपचार की जरूरत थी? या फिर कहीं इलाज की प्रक्रिया में चूक हुई? सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी प्रमोद कुशवाहा का कहना है कि बालक को नियमानुसार रेबीज के इंजेक्शन लगाए गए थे। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा तथ्यों की जांच की जा रही है।











