आगरा। सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश के बाद टीटीजेड में उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया सख्त कर दी गई। हर आवेदन की जांच उपायुक्त उद्योग, एसडीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तीन सदस्यीय समिति करेगी। नीरी और सीईसी के विशेषज्ञों की मौजूदगी के बिना मंजूरी संबंधी बैठक नहीं होगी। किसी विशेषज्ञ की आपत्ति होने पर मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाएगा।
गुरुवार को मंडलायुक्त नगेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए नई प्रक्रिया तय की गई। अधिकारियों का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, लेकिन उद्योगों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है। बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल, आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की उपाध्यक्ष एम. अरून्मौली, उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र सिंह, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में निर्णय लिया गया कि अब उद्योगों से जुड़े प्रत्येक आवेदन की जांच तीन सदस्यीय समिति करेगी। इस समिति में संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम), उपायुक्त उद्योग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल होंगे। समिति उद्योग इकाई का पूरा विवरण, भूमि उपयोग, उद्योग की श्रेणी, वायु प्रदूषण स्कोर, पर्यावरणीय प्रभाव, अनापत्ति प्रमाण पत्र और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेजों की विस्तार से जांच करेगी। दस्तावेजों के साथ-साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था के तहत टीटीजेड प्राधिकृत समिति की बैठक अब तभी होगी जब उसमें नीरी और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी के विशेषज्ञ उपस्थित होंगे। यदि किसी एक विशेषज्ञ ने भी किसी प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कर दी, तो उस मामले को अंतिम निर्णय के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भेजा जाएगा।











