आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव-2026 के समापन अवसर पर कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पेपर लीक होने से सिर्फ परीक्षा प्रभावित नहीं होती बल्कि उन युवाओं का भविष्य भी दांव पर लग जाता है जो सीमित आयु में प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की तैयारी करते हैं। एक परीक्षा प्रभावित होने से अभ्यर्थी का एक साल बर्बाद होता है और उम्र की सीमा पार होने पर वह अगली परीक्षा के लिए पात्र भी नहीं रह पाता।
खंदारी परिसर के जेपी सभागार में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए पुष्टि (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक) और मित्रा (राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन) का प्रभावी क्रियान्वयन रहा। एनसीटीई, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षाविदों ने भाग लिया। कुलाधिपति ने मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कहते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इसे महत्व दिया गया है लेकिन व्यवहार में बच्चों को अंग्रेजी बोलने के लिए अधिक प्रेरित किया जाता है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है मगर बच्चों को पहले अपनी भाषा में समझने, बोलने और सोचने का अवसर मिलना चाहिए। सम्मेलन में एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि देश में लगभग 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 25 करोड़ विद्यार्थी हैं। शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों के व्यावसायिक मानकों को मजबूत करना और प्रभावी मेंटरिंग तंत्र विकसित करना जरूरी है। उन्होंने मित्रा के तहत राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन की भूमिका समझाई। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में रुकीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न परिसरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं। बुधवार को उन्होंने गोपालकुंज परिसर का दौरा किया। शिक्षकों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। साथ ही खंदारी स्थित मॉडल स्कूल के बच्चों से भी मुलाकात की।










