लखनऊ. यूपी विधानसभा चुनाव के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के तेवर काफी बदले से दिख रहे हैं. वह अपने चाचा शिवपाल यादव को नजरअंदाज कर रहे हैं. यही कारण है कि शिवपाल ने भाजपा की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है. सूत्रों की मानें तो भाजपा उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष बना सकती है.
वैसे यदि शिवपाल भाजपा की इस पेशकश को स्वीकार नहीं करेंगे तो वह एक विधायक बन कर ही रह जाएंगे लेकिन यदि वह विधानसभा उपाध्यक्ष बनते हैं तो उनकी हैसियत विपक्ष के नेता के बराबर की हो जाएगी और सदन में अखिलेश यादव के बगल की सीट उन्हें मिल जाएगी, जो काफी अहम होता है. इसके अलावा ऐसी स्थिति में अखिलेश के लिए भी उन्हे नजरअंदाज करना मुश्किल होगा.
ऐसी परंपरा रही है कि विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिया जाता है. भाजपा इसी परंपरा के तहत यह पद शिवपाल यादव को दे सकती है. शिवपाल सदन में सपा के टिकट पर चुनकर आए हैं और सपा सबसे बडी विपक्षी पार्टी है, दूसरा शिवपाल के नजदीक आने से यादव खेमे में यह संदेश जाएगा कि भाजपा किसी जाति के साथ भेदभाव नहीं करती है. वह सबको साथ लेकर चलना चाहती है. इसका लाभ उसे 2024 में मिल सकता है











