वॉशिंगटन/मास्को। यूक्रेन युद्ध के बीच आजादी के बाद से लेकर अब तक भारतीय विदेश नीति का आधार रही गुटनिरपेक्षता की नीति से अमेरिका खफा है। अमेरिका का बाइडन प्रशासन चाहता है कि भारत गुटनिरपेक्षता की विश्व प्रसिद्ध नीति से नाता तोड़े, जिसके जनक जवाहर लाल नेहरू थे। यही नहीं अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत रूस से भी दूरी बना ले, जो हर संकट में हिंदुस्तान के साथ खड़ा रहता है। अमेरिका की उप विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने पीएम मोदी और जो बाइडन के बीच वर्चुअल मीटिंग से ठीक पहले भारत को यह चेतावनी दी है।
वेंडी शर्मन ने बाइडन और मोदी की मुलाकात से ठीक पहले अमेरिकी संसद की शक्तिशाली विदेशी मामलों की समिति के सामने दिए अपने बयान में भारत को यह चेतावनी दी। शर्मन ने कहा कि अमेरिका यह पसंद करेगा कि भारत अपनी ऐतिहासिक गुटनिरपेक्षता की नीति और रूस के साथ जी-77 भागीदारी से दूर हो जाए। इसी बैठक में शर्मन ने यह भी कहा कि भारत के साथ रक्षा व्यापार को बढ़ाने का शानदार अवसर है, जो हिंद प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और समृद्धि के जटिल लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत के साथ बेहद जटिल संबंध साझा करता है।
अमेरिकी उप विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने कहा कि हम निश्चित रूप से चाहेंगे कि भारत अपनी गुटनिरपेक्षता की नीति और जी-77 में रूस के साथ भागीदारी से दूर हो। अमेरिका ने भारतीय अधिकारियों से कहा है कि अब रूस पर प्रतिबंधों की वजह से मास्को से (हथियारों के) कलपुर्जों को पाना या उन्हें बदलना बहुत ही मुश्किल होगा। भारत ने अमेरिका के साथ रक्षा संबंधों, रक्षा खरीद और सहउत्पादन के प्रयासों को मजबूत किया है और मैं समझती हूं कि इसे आने वाले समय में बढ़ाने का शानदार मौका है। अमेरिकी अधिकारियों ने भारत के रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस समझौते का विरोध किया है और चिंता जताई है। दरअसल, रूस- यूक्रेन युद्ध के बीच मास्को के प्रति भारत के न्यूट्रल रहने से अमेरिका भड़का हुआ है।
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