नई दिल्ली। सोनिया गांधी के साथ 10 दिनों तक चली लंबी एक्सरसाइज के बाद अचानक प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल नहीं होने की बात ने सभी को चौंका रखा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण सामने आया है। बताया जा रहा है कि प्रशांत ने प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी में अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी देने की मांग की थी और साथ ही वे पार्टी के अंदर सुधारों के लिए फ्री हैंड, यानी हर तरह की छूट चाहते थे, लेकिन सोनिया राहुल गांधी को ही पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहती हैं। ऐसे में उनके पुत्रमोह के कारण पीके को पार्टी में एंट्री से पहले ही बाहर का रास्ता देखना पड़ा है।
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार सुबह तक सब कुछ ठीक था। सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए
एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप 2024 के गठन की घोषणा की थी और प्रशांत किशोर को इस ग्रुप में शामिल होने का आॅफर दिया था, लेकिन प्रशांत ने प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि कांग्रेस को मेरी नहीं, अच्छी लीडरशिप और बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है। मंगलवार सुबह कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट के जरिए प्रशांत को प्रस्ताव दिए जाने और उनके इसे ठुकरा देने की जानकारी दी। इसके बाद से ही कयासबाजी के दौर शुरू हो गए थे।
प्रशांत के कांग्रेस में शामिल होने से इनकार करने को लेकर दो तरह की असहमतियां सामने आई थीं। कांग्रेस की तरफ से कहा गया कि उन्हें एक निश्चित जिम्मेदारी लेने के लिए कहा गया था, जबकि प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उन पर चुनावों की जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव बनाया गया। प्रशांत ने अपने ट्वीट में साफतौर पर कहा भी कि कांग्रेस उनकी तरफ से सुझाए गए बड़े पैमाने पर जरूरी सुधारों को स्वीकारने को तैयार नहीं है, जिनमें कांग्रेस के ढांचे में बदलाव के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष के कार्यकाल का मुद्दा शामिल है और पार्टी उन्हें केवल चुनावी रणनीति तक सीमित रखना चाहती है। दरअसल प्रशांत का सुझाव था कि पार्टी को निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत है, साथ ही साथ चुनाव प्रबंधन और संगठनात्मक प्रबंधन के लिए निश्चित विंग बनाने का भी उनका प्रस्ताव था। इसके अलावा वे पार्टी में जरूरी सुधारों को लागू करने में भी अपने लिए खुली छूट चाहते थे, लेकिन कांग्रेस के वेटरन नेता उन्हें इतनी छूट देने के लिए तैयार नहीं थे। कांग्रेस के एक पदाधिकारी का दावा है कि प्रशांत किशोर चाहते थे कि पार्टी प्रधानमंत्री पद के लिए अलग चेहरा और अध्यक्ष पद के लिए किसी दूसरे का चुनाव करे। पार्टी अध्यक्ष पद के लिए उन्होंने प्रियंका गांधी का नाम सुझाया था, जबकि सोनिया गांधी समेत तमाम वेटरन नेता राहुल गांधी को दोबारा पार्टी चीफ बनाना चाहते थे। विचारों के इस टकराव के कारण ही पीके और कांग्रेस के रास्ते अलग हो गए।
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