आगरा। आगरा कमिश्नेरट पुलिस बिना चिकित्सकों से जांच कराए खुद ही मान लेती है कि व्यक्ति की मौत हो गई है। नमक की मंडी में मंगलवार को हुई घटना में दो कारीगर बेहोश पड़े थे। पुलिस ने देखते ही मान लिया कि उनकी मौत हो गई। दोनों को लोडर में लादकर सीधे पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। बाद में जब यह सवाल उठा कि दोनों को मृत किसने घोषित किया तो थाना पुलिस नजरे झुकाकर खड़ी हो गई। इसके बाद दोनों कारीगरों को इमरजेंसी भेजा गया। ईसीजी हुआ। डॉक्टर ने मृत घोषित किया। तब शवों को दोबारा पोस्टमार्टम हाउस लाया गया। लेकिन सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि पुलिस सीधे उन्हें एसएन क्यों नहीं ले गई थी? इसके साथ ही एंबुलेंस क्यों नहीं बुलाई थी।
पुलिस एंबुलेंस बुलाने की जगह लोडर का इस्तेमाल कर रही है। पिछले दिनों न्यू आगरा में तरुण चौहान ने मां-बेटे की हत्या के बाद खुदकुशी की थी। तीन शवों को पोस्टमार्टम हाउस पुलिस ने लोडर से भिजवाया था। एंबूलेंस मौके पर नहीं बुलाई गई थी। ऐसा ही कुछ नमक की मंडी में हुई घटना के बाद हुआ। पुलिस ने लोडर बुलाया। दोनों कारीगर आकाश व रवि को उसमें लादा। सीधे पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। लोडर वाला उन्हें नीचे उतारकर चला गया। बाद में अधिकारी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। कोतवाली पुलिस से पूछा गया कि डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था। यह सवाल उठते ही पुलिस खामोश हो गई। आनन-फानन में दोनों कारीगरों को इमरजेंसी लाया गया। ईसीजी कराया गया। इस पूरे घटनाक्रम में करीब पौने एक घंटे समय खराब हुआ। पुलिस ने यह उचित ही नहीं समझा कि दोनों जीवित हो सकते हैं।











