-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में प्राची गुप्ता गोल्डन गर्ल बनेंगी। वह एसएन मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल वर्ग की छात्रा हैं। उन्हें 10 स्वर्ण पदक दिए जाएंगे।
पांच मार्च को विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित होगा। इसमें 110 पदक दिए जाएंगे। सूची विश्वविद्यालय ने वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। 24 फरवरी तक आपत्तियां मांगी गई हैं।152 पदकों की सूची है, 42 पदक विभिन्न कारणों से नहीं दिए जाएंगे। इसमें कुछ पाठ्यक्रम बंद हो गए हैं। कुछ के परिणाम नहीं हैं। इधर पांच मार्च को दीक्षांत समारोह आयोजित होना है। अभी तक भारी संख्या में छात्रों का रिजल्ट सही नहीं हुआ है। वह रोजाना परीक्षा नियंत्रक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जबकि सभी छात्रों का रिजल्ट सही होने के बाद ही तिथि घोषित होनी चाहिए थी। कई छात्र ऐसे हैं जिनका एक-दो विषय में एमडब्लू आया है। अगर उनके नंबर चढ़ जाएंगे तो हो सकता है वह टॉपर बन जाएं।
एक छात्रा का आया था एमडब्ल्यू, री एग्जाम देना पड़ा था, दूसरी छात्रा को बना दिया था टॉपर
वर्ष 2022 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की एमएससी छात्रा की विवि ने कॉपी खो दी। पेपर में एमडब्ल्यू लगा दिया। छात्रा ने उपस्थिति सीट और बुकलेट लेकर परीक्षा नियंत्रक के सामने कई बार चक्कर लगाए। कहा कि उसने पेपर दिया था, फिर भी चौथे पेपर में एमडब्ल्यू लगा आया है। छात्रा उनके सामने रोई, गिड़गिड़ाई लेकिन परीक्षा नियंत्रक का दिल नहीं पसीजा। छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक की लचर कार्यशैली और अपने भविष्य की चिंता को देख री एग्जाम दे दिया। छात्रा के री एग्जाम में भी 98 अंक आए। छात्रा ने टॉप करता देखकर भी अपना नाम मेडल सूची में नहीं होता देख मेडल देने की मांग की। विवि ने उसे टॉपर देख भी टहलाया और कहा कि उसने री एग्जाम दिया है। री एग्जाम देने वाले बच्चे को मेडल नहीं दिया जाता। छात्रा ने कोर्ट जाने की धमकी दी। इसके बाद विवि अधिकारियों ने अपने को फंसता देख छात्रा को मेडल देने का निर्णय ले लिया है।
बता दें कि स्मृति सिंह सिसौदिया ने केआरआरसीएम कॉलेज मैनपुरी से एमएससी रसायन विज्ञान में किया था। छात्रा के प्रथम वर्ष में 600 में से 580 नंबर यानि की 96.66 प्रतिशत अंक आए। इतने नंबर आने के बाद छात्रा ने मेडल की उम्मीद में द्वितीय वर्ष में भी दिन-रात पढ़ाई की। छात्रा के द्वितीय वर्ष के चारों पेपर बहुत अच्छे हुए। छात्रा के प्रथम पेपर में 100 में से 96, द्वितीय में 92, तृतीय में 98 नंबर आए। छात्रा को क्या पता था कि फर्जीवाड़े और घोटाले से आंबेडकर विवि में उसकी कॉपी गायब कर दी जाएगी। विवि ने छात्रा के चौथे पेपर में एमडब्ल्यू लगा दिया। छात्रा यह देख तनाव में आ गई। क्यों कि उसने पेपर दिया था। सबूत के तौर पर छात्रा के पास उपस्थिति सीट और चौथे पेपर की परीक्षा केंद्र पर जमा हुई ओएमआर पेपर की बुकलेट भी थी। वह यह दोनों लेकर परीक्षा नियंत्रक के पास आई और कहा मैंने पेपर दिया था फिर भी चौथे पेपर में एमडब्ल्यू आ गया है। परीक्षा नियंत्रक ने उसकी एक नहीं सुनी और टहला दिया। छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक के अनेकों चक्कर लगाए। हर बार एक ही जवाब मिला तुम्हारी कॉपी खो गई है। छात्रा ने परीक्षा नियंत्रक से यह भी कहा कि मैं टॉपर हूं। मेरे प्रथम वर्ष में सर्वाधिक नंबर थे। द्वितीय वर्ष में भी तीन पेपर में 90 से ऊपर नंबर हैं, लेकिन परीक्षा नियंत्रक ने उसकी एक नहीं सुनी। अपने भविष्य की चिंता को लेकर छात्रा परीक्षा नियंत्रक के सामने रोई, गिड़गिड़ाई लेकिन परीक्षा नियंत्रक ने उसकी कॉपी नहीं सर्च कराई। इसके बाद छात्रा को मजबूरी में री एग्जाम में बैठना पड़ा। री एग्जाम में भी छात्रा ने 98 अंक हासिल किए।











