आगरा। ताजमहल की सुरक्षा के लिए बनाए गए ताज ट्रेपेज़ियम जोन (टीटीजेड) में वर्षों से लागू औद्योगिक प्रतिबंधों के कारण लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर का विशाल क्षेत्र अपनी पूरी आर्थिक क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है। अब इस मुद्दे को लेकर उद्योग जगत ने तकनीक आधारित समाधान के साथ सरकार के सामने निर्णायक पहल की मांग उठाई है।
डेवलपमेंट काउंसिल फॉर फुटवियर एंड लेदर इंडस्ट्री के अध्यक्ष पूरन डावर ने शनिवार को आगरा के दौरे पर आए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रत्यावेदन देकर मांग की कि राज्य सरकार इस विषय को नवीन तकनीकी व्यवस्थाओं और ठोस तथ्यों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे, ताकि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलित तथा स्पष्ट नीति निर्णय हो सके। पूरन डावर ने अपने प्रत्यावेदन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन आधुनिक तकनीक के युग में प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी साधन उपलब्ध हैं। यदि उद्योगों में वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली लागू की जाए तो पर्यावरण की सुरक्षा के साथ औद्योगिक गतिविधियों को भी व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि टीटीजेड क्षेत्र में संचालित औद्योगिक इकाइयों में एयर पॉल्यूशन मीटर अनिवार्य किए जाएं, ताकि उत्सर्जन की निरंतर निगरानी हो सके। यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि सभी उद्योगों में लिक्विड डिस्चार्ज मीटर यानी एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएं, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट के प्रवाह पर लगातार नजर रखी जा सके। इसके साथ ही प्रत्येक इकाई को रियल टाइम सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाए, जिससे प्रदूषण स्तर की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सके।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की डिजिटल निगरानी
पूरन डावर ने सुझाव दिया कि इस पूरी प्रणाली की निगरानी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाए। इस व्यवस्था में यदि किसी इकाई का प्रदूषण स्तर निर्धारित मानकों से अधिक पाया जाता है तो तत्काल ऑटो अलर्ट जारी हो और संबंधित इकाई के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सर्वोच्च न्यायालय को दिया जा सकता है भरोसा
उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीक आधारित पारदर्शी प्रणाली लागू होने से सर्वोच्च न्यायालय को यह विश्वास दिलाया जा सकेगा कि प्रदेश में पर्यावरणीय निगरानी पूरी तरह टेक्नोलॉजी बेस्ड और रियल-टाइम है। इससे ताजमहल की सुरक्षा के साथ-साथ उद्योगों को भी नियंत्रित और जिम्मेदार ढंग से संचालित करने का रास्ता खुल सकता है।
औद्योगिक अनिश्चितता से ठहरा विकास
पूरन डावर ने अपने प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया कि टीटीजेड से संबंधित नीतिगत अनिश्चितता के कारण इस क्षेत्र में निवेश, उद्योग विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाएं प्रभावित हो रही हैं। लगभग 10,000 वर्ग किलोमीटर में फैला यह क्षेत्र यदि स्पष्ट नीति के साथ विकसित होता है तो यह उत्तर प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।











