आगरा। कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने अपने कार्यकाल में अतिथि प्रवक्ताओं और संविदा शिक्षकों की जो भर्ती की थी, उसमें भी धांधली होने की जानकारी एसटीएफ को मिली है। एसटीएफ ने मामले में जांच शुरू कर दी है। गुरुवार को एसटीएफ ने अतिथि प्रवक्ताओं और शिक्षकों की चयन प्रक्रिया कैसी हुई है और किन-किन का चयन हुआ है, यह रिकॉर्ड विश्वविद्यालय प्रशासन से लिया है। रिकॉर्ड लिए जाने के बाद विश्वविद्यालय में खलबली मच गई है।
कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के खिलाफ लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में भ्रष्टाचार एवं अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। कुलपति के खास अजय मिश्रा को जेल भेज दिया गया है। इधर एसटीएफ कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के कार्यकाल में हुए भुगतान और धांधली की जांच कर रही है। अभी तक कई मामले में एसटीएफ को पुख्ता साक्ष्य मिल गए हैं। इससे लग रहा है कि आने वाले समय में कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की मुश्किलें और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं। एसटीएफ के द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन से कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक के आठ महीने के कार्यकाल में कितने करोड रुपए का भुगतान हुआ है यह जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही उनके कौन-कौन अधिकारी और शिक्षक खास थे उनकी जानकारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुलपति के कई खास एसटीएफ की रडार पर है। एसटीएफ ने इन सभी के पते-ठिकाने विश्वविद्यालय से ले लिए हैं। बुधवार को एसटीएफ के द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन से जानकारी मांगी गई थी कि अतिथि और संविदा शिक्षकों की भर्ती के लिए कुलपति ने कितनी तरह के विज्ञापन जारी किए थे। परिनियमावली के अनुसार कितने समय के लिए शिक्षक नियुक्त किए जा सकते हैं। वहीं कुलपति के द्वारा किन-किन शिक्षकों का चयन किया गया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरा रिकॉर्ड एसटीएफ के हवाले कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ शिक्षकों को तीन साल तो कुछ को एक साल के लिए नियुक्त किया गया है। ऐसा क्यों किया गया है। इसके साथ ही किन-किन अध्ययनरत छात्रों को नियुक्ति दी गई है। इस बात की भी अब एसटीएफ के द्वारा जांच की जा रही है। कुलपति के खास रहे लोगों के कितने मिलने वाले नियुक्त किए गए हैं। यह जानकारी भी टीम के द्वारा की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई उम्मीदवार योग्य नहीं थे फिर भी उन्हें नियुक्ति दे दी गई।
इधर कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने एफआईआर को चुनौती देने के लिए लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। आज इसमें फैसला आना था। अब 10 नवंबर को सुनवाई होगी।











