कोलकाता। पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट पर 12 अप्रैल को मतदान होने जा रहा है। इस सीट पर सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। टीएमसी ने इस सीट से शत्रुघ्न सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि उनके सामने बीजेपी से अग्निमित्रा पॉल मैदान पर हैं। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस कभी नहीं जीती है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार शत्रुघ्न सिन्हा टीएमसी के लिए इतिहास बदल पाएंगे?
शत्रुघ्न सिन्हा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनका बाहरी होना है। पिछले साल बंगाल विधानसभा चुनाव इंसाइडर वर्सेज आउटसाइडर पर लड़ा गया था। ममता बनर्जी ने बीजेपी को बाहरी पार्टी बताते हुए चुनाव प्रचार किया था, जिसका उन्हें फायदा भी हुआ। शत्रुघ्न सिन्हा जबसे आसनसोल आए हैं, उन्हें लगातार इन सवालों से जूझना पड़ रहा है कि टीएमसी ने आखिर बाहरी को टिकट क्यों दिया? ‘बाहरी आते-जाते हैं, बंगाल अपनी बेटी चाहता है’, भले ही टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस नारे का इस्तेमाल बीजेपी के खिलाफ किया हो लेकिन इससे आसनसोल में उनके अपने ही उम्मीदवार फंस गए हैं। शत्रुघ्न सिन्हा अक्सर जनसभाओं में यह कहते हुए अपना बचाव करते आए हैं कि वह बिहारी बाबू ही नहीं है बल्कि बंगाली बाबू भी है। उन्होंने कहा कि अगर मैं आसनसोल में बाहरी हूं तो नरेंद्र मोदी वाराणसी में क्या हैं?
शत्रुघ्न सिन्हा के सामने बीजेपी ने फैशन डिजाइनर से विधायक बनी अग्निमित्रा पॉल को उम्मीदवार बनाया है जो खुद को बंगाल की बेटी बता रही हैं। वह कहती हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ही हमें सिखाया है कि जो भी बंगाल में बाहर से आया है, वह बाहरी है। शत्रुघ्न सिन्हा के सामने दूसरी बड़ी चुनौती उनकी क्रेडिबिलिटी भी है। बिहार में उन्हें पटखनी देने वाले रविशंकर प्रसाद और रामकृपाल यादव ने भी आसनसोल में जनसंपर्क किया। इस दौरान उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा की पटना फाइल्स का जमकर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पटना से शत्रुघ्न सिन्हा को दो-दो बार संसद भेजा। केंद्र में मंत्री बनाया और राज्यसभा भी भेजे गए लेकिन फिर भी वह पटना के लोगों के नहीं हुए तो आसनसोल के कैसे हो पाएंगे। पटना साहिब क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर लगातार दो बार से जीतने वाले शत्रुघ्न सिन्हा 2019 के लोकसभा चुनाव में हार गए थे। तब शत्रुघ्न बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर मैदान में थे। रविशंकर ने दो लाख 85 हजार से भी ज्यादा वोटों से शत्रुघ्न को हराया था।











