आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए बुरी खबर है। विवि का मेन अकाउंट खाली हो गया है। तत्काल प्रभाव से फीस वाले अकाउंट से दस करोड़ रुपये ट्रांसफर करने पड़े हैं। फीस वाले खाते में भी अब 20 करोड़ रुपये से कुछ अधिक ही बाकी बचे हैं। यह खर्च होने के बाद विवि को एफडी तोड़नी पड़ सकती हैं। हालांकि विवि के पास एफडी अच्छी खासी हैं, लेकिन एफडी टूटने का मतलब है भविष्य में संकट के बादल छाना।
विवि में फ़िज़ूलख़र्ची के कई कीर्तिमान बन चुके हैं। पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित ने भी 145 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य कराए थे। विवि के पास कार्यक्रम करने के लिए जुबली हॉल, जेपी सभागार था, फिर भी 19 करोड़ का शिवाजी मंडप बना दिया गया। यही नहीं जिस जमीन का विवि भूस्वामी नहीं है उस पर 40 करोड़ की बिल्डिंग खड़ी कर दी गई। इस बिल्डिंग के लिए पांच करोड़ रुपये से ऊपर का फर्नीचर भी मंगाया जा रहा है। जबकि इस बिल्डिंग की विजिलेंस जांच चल रही है। विवि का पिछले कुछ सालों में इतना पैसा बर्बाद हो गया है कि आने वाले समय में एफडी टूटने की नौबत आ गई है। इसके टूटते ही कर्मचारियों को वेतन और पेंशन के लिए भी परेशान होना पड़ सकता है।
बुधवार को पांच करोड़ की फाइलें हुईं
आगरा। बुधवार को पांच करोड़ रुपये के भुगतान की फाइल क्लियर हुई हैं। इनमें एक एजेंसी को तीन करोड़ दो लाख रुपये, अलीगढ़ के लिए जो फाइल स्केन होकर गई थी उसके मालिक आदर्श पाठक को 25 लाख रुपये दिए गए हैं। एक पेज एक रुपये 40 पैसे में स्केन हुआ है। इसके अलावा एक बहुत बड़ा भुगतान विवि के इतिहास में पहली बार हुआ है, जिसे सुनकर सभी अचंभित रह जाएंगे। विवि ने आवासीय विंग में प्रवेश के लिए जो विज्ञापन निकाला था उसका बिल तीन से चार करोड़ रुपये का है। इसमें से 1.60 करोड़ का बुधवार को भुगतान का चेक बन गया है। इससे पहले भी एक चेक बन चुका है। आवासीय विंग में हर साल करीब 500 छात्र प्रवेश लेते हैं। इनमें आईईटी, फार्मेंसी, दाऊदयाल में छात्र स्वत: ही प्रवेश लेने आ जाते हैं। इनकी संख्या करीब 300 रहती है। बचे सिर्फ 200 छात्र। ऐसे में विज्ञापन का औचित्य समझ से परे है। इतनी तो फीस भी नहीं आएगी जितना विवि ने विज्ञापन पर खर्च कर दिया। इसके अलावा अभी विवि को शिक्षकों, संविदा शिक्षकों, अतिथि प्रवक्ताओं का वेतन देना है। इसके लिए पैसा विवि को जेब से ही देना पड़ेगा। यही नहीं चार्टों का डिजिटाइज़ेशन कराने के लिए भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
अलीगढ़ विवि अलग होने के बाद मुनाफा होगा कम
आगरा। अभी तक विवि की हर साल 120 करोड़ की इनकम थी और 90 करोड़ का खर्चा था। अब अलीगढ़ के चार जिले अलग हो गए हैं। इसके अलावा शिकोहाबाद में दो निजी विवि भी हैं। मथुरा में भी दो-तीन निजी विवि हैं। पांच से छह नए निजी विवि खुलने जा रहे हैं। इस सत्र से फीस भी कम हो गई है। इससे विवि हर साल घाटे में जाएगा, ऐसी केलकुलेशन लगाई जा रही है।
कंप्यूटर के ज्ञानदाता 60 फिर भी बाहर से कंपनी बुलाई जा रहीं
आगरा। विवि में कंप्यूटर के ज्ञानदाताओं की बात करें तो इनकी संख्या 60 है। इनमें कई प्रोफेसर, अनुबंधित शिक्षक, टेक्निशियन, सहायक टेक्निशियन, प्रोग्रामर, कंप्यूटर एनालिस्ट शामिल हैं। फिर भी विवि प्रशासन बाहर से एजेंसी को हायर कर उनसे काम कराता है। यह काम यहां के कंप्यूटर ज्ञाता कर सकते थे। इसके अलावा अलीगढ़ के लिए फाइल स्केन कर भेजी गई। यह काम भी यही के कंप्यूटर विभाग से जुड़े लोग कर सकते थे। फिर भी उसे 25 लाख रुपये दे दिए गए। एजेंसी से रिजल्ट बनवाया जा रहा है उस पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं। यह काम भी यहां के कंप्यूटर के ज्ञानदाता कर सकते हैं। चार्टों का डिजिटलाइजेशन भी उनके द्वारा किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय के हालात को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन नहीं उठा।











