-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी सहित 11 लोगों के खिलाफ एक कर्मचारी ने कोर्ट में एफआईआर के लिए याचिका डाली थी। आरोप लगाया कि दोबारा नौकरी लगाने के लिए उससे 10 लाख रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है। विश्वविद्यालय के द्वारा बनाई गई कमेटी ने उसकी सेवा बहाली पर विचार करने के लिए कहा है। फिर भी रिश्वत के चक्कर में उसे नौकरी पर नहीं रखा जा रहा। मामले में सीजेएम ने सभी के खिलाफ परिवाद दाखिल कर लिया है। इसके बाद इन सभी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बता दें कि विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में तैनात रहे कर्मचारी वीरेश कुमार ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल, पूर्व कुलसचिव राजीव कुमार, प्रोफेसर अनिल वर्मा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, प्रोफेसर संजय चौधरी, सहायक कुलसचिव पवन कुमार, प्रोफेसर बीडी शुक्ला, अधीक्षक अमृतलाल, मोहम्मद रईस, बृजेश श्रीवास्तव के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। वीरेश ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा है कि वह इतिहास विभाग में 23 वर्षों से कार्यरत था। विभाग में 2015-16 से विश्वविद्यालय की पूर्व वर्षों की अंकतालिका में गलतियां ठीक कर संशोधित किए जाने का कार्य होता था। इस कार्य को प्रोफेसर बीडी शुक्ला और प्रोफेसर अनिल वर्मा करते थे। इनके द्वारा कर्मचारी रईस के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करते हुए अंकतालिकाओं में फेरबदल किया जाता था। जब शासन और प्रशासन स्तर पर जांच कार्रवाई की जा रही थी तो उनके द्वारा सबूत को नष्ट करने के लिए सभी प्रपत्र 12 दिसंबर 2020 को जला दिए गए। उसी दिन मुझे प्रोफेसर अनिल वर्मा ने बुलाया और कहा कि बाहर रद्दी जल रही है, जरा देख कर आओ की जली या नहीं। मैं मौके पर गया तो भारी मात्रा में अंकतालिका जल रही थीं। मुझे नहीं पता था कि मुझे जानबूझकर वहां भेजा गया है। थोड़ी देर में वहां कुलपति प्रो. अशोक मित्तल आ गए और कुलपति ने बिना जांच किए मेरी सेवाएं समाप्त कर दीं। यही नहीं प्रोफेसर अनिल वर्मा ने मुझसे कहा कि अगर तुम मुझे 10 लाख दोगे तो मैं तुम्हारी नौकरी दोबारा लगवा दूंगा। प्रोफेसर अनिल वर्मा को लेकर वीरेश ने याचिका में कहा है कि उनके खिलाफ विजिलेंस ने भी भ्रष्टाचार का हरी पर्वत थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें चार्जशीट भी लग गई है। सीजेएम के यहां दायर याचिका में उसने कहा है कि मामले में उसने 2021 में स्पेशल सीजेएम कोर्ट में एफआईआर के लिए याचिका डाली थी। स्पेशल सीजेएम के यहां धारा 409, 406, 420, 467, 468, 471, 384, 120 बी के तहत सभी आरोपियों के खिलाफ परिवाद दाखिल हो गया। विश्वविद्यालय में हुई कार्य परिषद की बैठक में निर्णय लिया गया कि अगर वीरेश कुमार के द्वारा न्यायालय से केस वापस ले लिया जाता है तो विश्वविद्यालय में पुनः बहाली पर विचार किया जाएगा। इसी भाषा में सहायक कुलसचिव पवन कुमार ने पत्र भी निकाला था। विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा यह पत्र निकाले जाने के बाद वीरेश ने अपना वाद वापस ले लिया। वीरेश कुमार ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि उसे बहाल किए जाने के लिए विश्वविद्यालय के द्वारा बनाई गई कमेटी ने भी आदेश पारित किए थे। कमेटी की रिपोर्ट के साथ ही सहायक कुलसचिव पवन कुमार का वह पत्र भी जिसमें कहा गया है कि केस वापस लेने पर उनकी बहाली पर विचार किया जाएगा। यह दोनों पत्र उसने अपनी याचिका के साथ लगाए हैं।
वीरेश कुमार ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि केस वापस लेने के बाद भी उसे नौकरी पर नहीं रखा गया। सहायक कुलसचिव पवन कुमार ने उनसे कहा पुनः नियुक्ति को 10 लाख रुपए लगेंगे। उन्होंने कहा मेरी कुलपति प्रो. आशु रानी और कुलसचिव राजीव कुमार से बात हो गई है। याचिका पर सुनवाई के बाद सीजेएम अचल प्रताप सिंह ने अपने आदेश में लिखा है कि प्रस्तुत मामले में आवेदक को समस्त तथ्यों की व्यक्तिगत रूप से जानकारी है जिन्हें वह अपने साक्ष्य के माध्यम से साबित कर सकता है। प्रस्तुत प्रकरण के तथ्य एवं परिस्थितियों और माननीय उच्च न्यायालय की उपरोक्त विधि व्यवस्थाओं के परिप्रेक्ष्य में प्रार्थना पत्र परिवाद के रूप में पंजीकृत किए जाने योग्य है।
सीजेएम ने कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल, पूर्व कुलसचिव राजीव कुमार, प्रोफेसर बीडी शुक्ला, प्रोफेसर अनिल वर्मा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, प्रोफेसर संजय चौधरी, सहायक कुलसचिव पवन कुमार, कार्यालय अधीक्षक अमृतलाल, बृजेश श्रीवास्तव, मोहम्मद रईस के खिलाफ परिवाद दाखिल कर लिया है।
पूर्व में कई कुलपति भ्रष्टाचार में फंस चुके
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय की बात करें तो यहां कई कुलपति भ्रष्टाचार के मामले में फंस चुके हैं जिनकी जांच में चल रही हैं। कुलपति प्रोफेसर डीएन जौहर और कुलपति प्रोफेसर मोहम्मद मुजम्मिल के खिलाफ विजिलेंस ने हरीपर्वत थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें कई प्रोफेसर भी शामिल हैं। इनके खिलाफ चार्जशीट भी लग गई है। पूर्व कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित की भ्रष्टाचार के मामले में विजिलेंस जांच चल रही है। गोपनीय जांच में यह दोषी भी पाए जा चुके हैं। डॉ. अरविंद दीक्षित के बाद आए पूर्व कुलपति प्रोफेसर अशोक मित्तल को भ्रष्टाचार के चलते राज भवन के द्वारा हटाया गया था। अब वर्तमान कुलपति प्रोफेसर आशु रानी भी भ्रष्टाचार के मामले में फंस चुकी हैं। लोकायुक्त के यहां भी उनके खिलाफ शिकायत पर सुनवाई चल रही है। एक कर्मचारी ने रिश्वत के आरोप लगाकर शिकायत की थी। इसमें पूर्व कुलसचिव राजीव कुमार सहित कई शामिल हैं।











