आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के तमाम चक्कर लगाने के बाद भी बीएड के एक छात्र और छात्रा को डिग्री नहीं दी गई। दोनों ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। कुलाधिपति को भी पार्टी बनाया। कोर्ट ने 26 अप्रैल को कुलाधिपति को तलब किया है। कुलाधिपति के साथ कुलपति, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक भी तलब किए गए हैं। विवि की लापरवाही से कुलाधिपति की भी तलब होने की नौबत आ गई है।
बता दें कि विवि के हालात काफी बदतर हैं। यहां छात्रों को मार्क्सशीट्स-डिग्री देने के लिए काफी टहलाया जाता है। कुलपति आते हैं और यही दावे करके चले जाते हैं कि छात्र-छात्राओं को डिग्री समय से दिलाएंगे, लेकिन दिला नहीं पाते। कुलपति सहित अन्य अधिकारियों का फोकस डिग्री-मार्क्सशीट्स दिलाने की जगह केंद्र बनवाने, निर्माण कराने, मैनेजमेंट संबंधी मामलों में रूचि लेने में रहता है। सूत्रों का कहना है कि इन मामलों में बड़ा खेल होता है। इसलिए कुलपति की रुचि ज्यादा रहती है। वह यह भी नहीं सोचते कि विवि छात्रों के लिए ही हैं। कुलाधिपति के सामने दीक्षांत समारोह में बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं। जमीनी स्तर पर कुछ नजर नहीं आता।
रिट दाखिल करने वाले कौन हैं, जानें
छात्रा अर्पिता गुप्ता और मिंटू सिंह ने विवि से सत्र 2005 में बीएड किया है। दोनों ने मार्क्सशीट्स सत्यापित कराने और डिग्री देने को कई चक्कर लगाए लेकिन हर बार उन्हें टहला दिया गया। अंत में उन्होंने स्थाई लोक अदालत में याचिका दाखिल की।
छात्रा अर्पिता गुप्ता ने दो अगस्त 2011 को आंबेडकर विवि में डिग्री को 500 रुपये फीस जमा कराई थी। कई बार विवि के अधिकारियों से मुलाकात की। हर बार आश्वासन मिला कि डिग्री जल्द घर पहुंच जाएगी। छात्रा जब 14 जनवरी 2021 को विवि में फिर से पूछने गई कि डिग्री कब मिलेगी। इस पर उसे जवाब दिया गया कि मूल डिग्री नहीं दी जा सकती है। बीएड सत्र 2004-5 की जांच चल रही है। इस पर छात्रा ने कहा कि जो जांच में नहीं है, उनकी डिग्री निर्गत की जा सकती है। वह भी जांच में नहीं है। इस पर डिग्री विभाग ने कह दिया कि आपके प्रार्थना पत्र एवं रसीद की कॉपी नहीं मिल रही है। इसके बाद छात्रा ने 29 नवम्बर 2021 को फिर से डिग्री की फीस जमा की। इसके बाद भी उसे डिग्री नहीं दी। न ही उसकी मार्क्सशीट सत्यापित की।
छात्र मिंटू सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि 30 अक्टूबर 2011 को विवि में 500 रुपये डिग्री के लिए फीस जमा की थी। फीस जमा करने के बाद कई चक्कर लगाए लेकिन डिग्री नहीं दी। अंत में उससे कह दिया गया कि आपका आवेदन नहीं मिल रहा है। इसके बाद मिंटू सिंह ने डिग्री के लिए पुन: ऑनलाइन फीस जमा कर दी। फिर भी विवि ने उसे डिग्री नहीं दी। परेशान होकर मिंटू ने याचिका दाखिल की। मिंटू सिंह ने विपक्षीगणों से 15 लाख रुपये आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए दिलाए जाने की मांग भी की है।










