आगरा। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के बेटे के द्वारा पिटाई करने से आहत होकर आत्महत्या का प्रयास करने वाले विश्वविद्यालय के माली की पत्नी ने नाई की मंडी थाने में मंत्री के बेटे के खिलाफ तहरीर दी है। आरोप है कि काफी देर इंतजार करने के बाद थाना पुलिस ने यह तहरीर ली, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया है। पीड़िता और उनके भाई का कहना है कि थाने में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पहले वह न्यू आगरा थाने गए थे। यहां से नाई की मंडी भेजा। यहां भी काफी इंतजार कराने के बाद तहरीर लेकर तर्क दिया गया। दूसरी ओर जिस उप कुलसचिव पर ड्यूटी लगाने के माली द्वारा आरोप लगाए गए थे उन्हें प्रशासन विभाग से हटा दिया गया है। इसके साथ ही माली को कुलसचिव कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
बता दें की विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिनेश कुशवाहा माली का कार्य करते हैं। दिनेश कुशवाहा ने मंगलवार को विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया था। उनकी पत्नी साक्षी कुशवाहा का वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह आरोप लगा रही थीं कि मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के बेटे अलौकिक उपाध्याय ने उनके पति को बेरहमी से पीटा था। वह वहां दो साल से काम कर रहे हैं, उन्हें छुट्टी भी नहीं दी जाती है। संडे को नहीं जाने पर उन्हें मंत्री पुत्र ने पीटा है। मामले में विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ ने ताले डाल दिए थे। बुधवार को भी विश्वविद्यालय में कर्मचारियों ने कार्य का बहिष्कार किया। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी की मांग पर उप कुलसचिव पवन कुमार को प्रशासन विभाग से हटा दिया गया है। उनकी जगह ममता सिंह को प्रशासन विभाग दिया गया है। वहीं विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने यह आश्वासन भी दिया है कि वह माली का उपचार कराएंगे। इसके साथ ही माली को कुलसचिव कार्यालय में सम्बद्ध कर दिया गया है। आरोपों को उच्च शिक्षा मंत्री के द्वारा निराधार बताया जा रहा है। उनका कहना है कि उनके घर पर माली की तैनाती नहीं थी। जबकि माली और उनकी पत्नी बोल रहे हैं वह वहीं तैनात थे पुलिस चाहे तो सीसीटीवी कैमरे देख ले या उनकी सीडीआर निकाल ले।
इधर बुधवार शाम को दिनेश कुशवाहा की पत्नी साक्षी कुशवाहा मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ तहरीर लेकर न्यू आगरा थाने पहुंचीं। यहां एसीपी मौजूद थे। उन्होंने उनसे कहा कि उनके थाना क्षेत्र की घटना नहीं है। वह नाई की मंडी में जाएं। साक्षी कुशवाहा और उनके भाई महेंद्र कुशवाहा नाई की मंडी थाने में पहुंचे। महेंद्र कुशवाहा का कहना है कि यहां उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने तहरीर तक नहीं ली। काफी देर तक वह थाने में ही जमे रहे। इसके बाद तहरीर ली गई लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। उनका आरोप है कि पुलिस मंत्री के प्रभाव में है।
दिनेश कुशवाहा की पत्नी साक्षी कुशवाहा ने तहरीर में लिखा है कि उनके पति विश्वविद्यालय में 2006 से कार्यरत हैं। पिछले दो साल से विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव पवन कुमार द्वारा उनके पति को उच्च शिक्षा मंत्री के आवास पर कार्य करने के लिए भेज दिया गया था। यहां पर उनसे घरेलू, व्यक्तिगत कार्य जैसे झाड़ू, पोछा लगवाना, गाड़ियों की सफाई कराना, शौचालय साफ करवाना आदि कराए जाते थे। उनके पति के द्वारा कई बार विरोध किया गया लेकिन पवन कुमार द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री के दबाव में नौकरी से बर्खास्त करने की धमकी देकर चुप करा दिया गया। रविवार को पति के काम पर नहीं जाने के कारण 13 मई को उच्च शिक्षा मंत्री के बेटे अलौकिक उपाध्याय ने उनको गालियां देते हुए बेरहमी से पीटा और धमकी दी जहां चाहे वहां शिकायत कर ले। मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। पूरे विश्वविद्यालय को मैं और मेरे पिताजी चलाते हैं। आहत होकर मेरे पति ने 14 मई को सुबह सुसाइड नोट लिखने के बाद विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया। उनकी पत्नी ने तहरीर में यह भी लिखा है कि अगर भविष्य में उनके पति के साथ या परिजनों के साथ कोई घटना होती है तो उसके जिम्मेदार उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उनके बेटे अलौकिक उपाध्याय होंगे।
कमेटी को लेकर सपा और कांग्रेस ने उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने उच्च शिक्षा मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ पत्रकार वार्ता की। इसमें शहर उपाध्यक्ष निर्वेश शर्मा ने कहा कि आखिर कर्मचारी किसके आदेश पर उच्च शिक्षा मंत्री के यहां काम कर रहा था, उस अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उस कमेटी पर सवाल खड़े किए हैं जो कुलसचिव के द्वारा जांच के लिए बनाई गई है। निर्वेश शर्मा का कहना है कि कमेटी में प्रोफेसर बृजेश रावत को शामिल किया गया है, उनके पिता भारतीय जनता पार्टी में सांसद रहे हैं। ऐसे में वह मंत्री के खिलाफ निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि कमेटी में कर्मचारी और छात्र नेताओं को भी सम्मिलित किया जाए। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष गौरव शर्मा ने कहा कि मामले में मंत्री और उनके बेटे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी सदस्य अपूर्व शर्मा ने न्यायिक जांच की मांग की।

शाम को सपा छात्र सभा के शहर अध्यक्ष अमित प्रताप यादव के नेतृत्व में स्पीड कलर लैब के सामने मंत्री और उनके बेटे का पुतला भी दहन किया गया। पुतला दहन करने वालों में ललित राज, जितेंद्र धनगर, ओम पंडित, आफताब कुरेशी, विजय यादव, रघुवीर वाल्मीकि, निशांत, समीर, अभिषेक, शिवम, मनजीत, राम खिलाड़ी, सिद्धार्थ, शिवम बघेल, विकास चौधरी, अनुराग यादव, देवांश, अभय कुमार आदि शामिल रहे।











