-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने यूजी द्वितीय और तृतीय, पीजी प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए स्कीम जारी कर दी है। स्कीम के मुताबिक 26 अप्रैल से परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, जबकि छात्रों का कोर्स अभी तक पूरा नहीं हुआ है। अपर मुख्य सचिव शिक्षा ने भी पत्र जारी कर निर्देश दिए थे कि 31 मई तक शिक्षण कार्य होना चाहिए। एक जून से परीक्षाएं शुरू कराई जाएं, लेकिन फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन जल्दबाजी में लगा हुआ है। इसके पीछे बड़ा खेल बताया जा रहा है।
अपर मुख्य सचिव शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने विश्वविद्यालय में एक पत्र भेजा था। अपर मुख्य सचिव ने 31 मई तक शिक्षण कार्य कराने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही एक जून से 15 जुलाई तक के बीच परीक्षाएं कराने के निर्देश भी दिए थे। 20 अगस्त तक परीक्षा परिणाम जारी करने की डेडलाइन रखी थी। अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए पत्र को आंबेडकर विश्वविद्यालय में नहीं माना गया।
यूजी कोर्स के प्रथम सेमिस्टर की परीक्षाएं चल रही हैं। इन परीक्षाओं के लिए विश्वविद्यालय ने जो केंद्र बनाए थे उनमें जमकर गड़बड़ी हुई। एक ही मैनेजमेंट के कॉलेजों को आपस में केंद्र बना दिया गया। इसके अलावा अगर किसी कॉलेज वाले को 60 से 70 किलोमीटर दूर किसी कॉलेज में सुविधा मिल रही थी तो उसने अपना केंद्र वहीं बनवा लिया। शासन ने इस बात को लेकर जांच बैठा दी है। विशेष सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालय में एक गुट ने ठान लिया था कि वह यूजी द्वितीय और तृतीय, पीजी प्रथम और द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं भी इन्हीं केंद्रों पर करा देगा। इसके लिए विश्वविद्यालय ने 26 अप्रैल से परीक्षाएं कराने की स्कीम भी जारी कर दी। ऐसा इसलिए किया गया जिससे बनाए गए केंद्रों पर ही परीक्षाएं हो जाएं। जल्दी परीक्षाएं इसलिए कराई जा रही हैं क्योंकि 15 मई तक विश्वविद्यालय में नए कुलपति के आने की संभावना है। नए कुलपति अपने हिसाब से केंद्र बनवाते। इस गुट को लगता है कि पता नहीं नए कुलपति के सामने दाल गलेगी या नहीं?
अभी तक छात्रों का कोर्स पूरा नहीं हुआ है। फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन जल्दबाजी में उनकी परीक्षाएं करा रहा है। परीक्षा केंद्रों के खेल के चक्कर में वह छात्रों को फेल करने के लिए लगा हुआ है। छात्रों का कोर्स कंप्लीट नहीं हुआ है तो वह परीक्षाएं कैसे देंगे। अपर मुख्य सचिव के आदेश को भी यहां हवाई साबित कर दिया गया है। शासन में इस बात की शिकायत की जा रही है। डॉ. भूपेंद्र चिकारा, महामंत्री औटा











