आगरा। ताजगंज क्षेत्र में शनिवार को जो फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया था, वह दो साल से चल रहा था। इसको चलाने वाले नौकरी दिलाने के नाम पर करोडों रुपए की ठगी कर चुके हैं। रविवार को पुलिस ने यह खुलासा किया है।
डीसीपी आदित्य ने बताया फर्जी कॉल सेंटर से जुड़े आरोपी मूल रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर और बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने ठगी के लिए आगरा को अपना ठिकाना बनाया हुआ था। दोनों आरोपी करीब दो साल से थाना ताजगंज क्षेत्र में सक्रिय थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी कंपनी के नाम से सिक्योरिटी गार्ड और अन्य पदों पर नौकरी के विज्ञापन प्रसारित किए जाते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले युवाओं को नौकरी का भरोसा दिलाकर धीरे-धीरे रकम जमा कराई जाती थी। आरोपियों ने नौकरी की तलाश करने वाले लोगों को ठगने के लिए पूरा सिस्टम तैयार कर रखा था। संपर्क करने वाले अभ्यर्थी से सबसे पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर रकम ली जाती थी। इसके बाद उसे बताया जाता था कि जिस पद के लिए चयन हुआ है, उसके हिसाब से अलग शुल्क जमा करना होगा। इस रकम की वसूली के बाद भी ठगी का सिलसिला खत्म नहीं होता था। अभ्यर्थी को फाइनल ज्वाइनिंग लेटर देने के नाम पर भी रकम वसूली जाती थी। इस तरह एक ही व्यक्ति से अलग-अलग चरणों में कई बार पैसा लिया जाता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के निशाने पर केवल आगरा या आसपास के युवा नहीं थे, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सोशल मीडिया के माध्यम से जोड़ा जाता था। पुलिस के मुताबिक इस मामले में देशभर से 100 से अधिक शिकायतें मिलने की बात सामने आई है। अब तक की जांच में 2500 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बनाने की बात सामने आई थी, जबकि आरोपियों से जुड़े रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर करीब 3200 लोगों से ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।











