आगरा। छत्ता थाने में नए थानाध्यक्ष के रूप में अंकुर मलिक को तैनाती दी गई है। यह तैनाती थाने में पुलिसकर्मियों के बीच में चर्चा का विषय बन गई है। इसके पीछे कारण है कि थाने में थानाध्यक्ष से सीनियर चार दरोगा और हैं। तीन का अंतर भी एक साल, दो साल का नहीं पांच और सात साल का है। ऐसे में सीनियर दरोगा क्या अपने जूनियर को थानाध्यक्ष को ‘सर’ कहकर संबोधित करना होगा या थानाध्यक्ष अपने सीनियर को ‘सर’ कहकर संबोधित करेंगे, बात करेंगे। यह देखने के लिए थाने के पुलिसकर्मी उतावले हैं। वहीं सीनियर दरोगा अपने को पहले से ही असहज महसूस कर रहे हैं। दबी जुबा से नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं।
छत्ता थाने के इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार को लाइन हाजिर किया गया है। उनकी जगह 2020 बैच के अंकुर मलिक को थानाध्यक्ष बनाया गया है। छत्ता थाना इंस्पेक्टर थाना है। हालांकि ऐसा नहीं है कि पूर्व में यहां दरोगा थानाध्यक्ष नहीं रहे हैं लेकिन वह सीनियर रहे हैं। पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है एकदम नए दरोगा को कमान दे दी गई है। हालांकि पुलिस कमिश्नर अच्छे और गंभीर अधिकारी हैं। यह बात उनके संज्ञान में नहीं होगी कि थाने में थानाध्यक्ष से सीनियर चार पुलिसकर्मी और हैं। रकाबगंज में सैयां से जब निशामक त्यागी भेजे गए थे तब इंस्पेक्टर क्राइम को वहां से हटा दिया गया था जिससे जूनियर के अंडर में सीनियर काम ना करे। अगर छत्ता थाने के चारों पुलिसकर्मियों की बात भी संज्ञान में होती तो शायद अंकुर मलिक को चार्ज नहीं दिया जाता।
पुलिसकर्मी इस बात से अचंभित हैं कि उनसे सीनियर चार दरोगा थाने में और हैं। क्या यह जूनियर को सर कहकर संबोधित करेंगे। क्या उनके अंडर में काम कर पाएंगे? जो चार पुलिसकर्मी सीनियर है उनमें पहले नंबर पर एसएसआई सुरजीत यादव हैं। इनका बैच 2013 है। दूसरे नंबर पर चौकी प्रभारी जीवनी मंडी गौरव राठी हैं। वह 2015 बैच के हैं। तीसरे नंबर पर चौकी प्रभारी बेलनगंज विनोद कुमार हैं। यह भी 2015 बैच के हैं। गुदड़ी मंसूर खां पर जो चौकी प्रभारी सुखविंदर हैं, वह भी 2019 बैच के हैं। ऐसे में जूनियर पुलिसकर्मी को थानाध्यक्ष बनाया जाना थाना और पूरे विभाग में चर्चा का विषय बन गया है। पुलिसकर्मी आपस में चुटकी भी ले रहे हैं।











