वाराणसी। कोरोना की चौथी लहर की आशंका के बीच पूरे देश में एक बार फिर संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने लगे हैं। कोरोना के तीसरी लहर के बाद लगभग पूरे देश से कोविड के गाइडलाइंस को खत्म कर दिया गया था। लेकिन एक बार फिर से कोरोना के बढ़ते आंकड़ो ने बंदिशों की आशंका को गहरा दिया है। बीएचयू के जीव विज्ञानी ने एक सीरो सर्वे किया है जिसके तहत 116 लोगो के सैंपल लिए गए। इस सर्वे में बेहद चौकाने वाले आंकड़े आए है।
सर्वे में महज 17 फीसदी लोगों में ही एंटीबॉडी पाई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ो के लिहाज से अगर देखें तो प्रीकॉशन डोज महज 15 फीसदी लोगों को ही लगी है। सीरो सर्वे के आधार पर वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर 70 फीसदी से ज्यादा लोगों के अंदर एंटीबाडी खत्म हो जाती है तो कोरोना के आंकड़े बढ़ सकते हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने 10 सर्वे किए है। इसके तहत 116 लोगों के सैंपल लिए गए। इस सैंपल में जो आंकड़े आए हैं उसके मुताबिक महज 17 फीसदी में ही एंटीबॉडी पाई गई है। 46 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी लगभग खत्म होने के कगार पर है। प्रोफेसर चौबे ने बताया कि अगर 70 फीसद से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी खत्म हो जाती है तो कोरोना के आंकड़े बढ़ने का खतरा है। ऐसे में दूसरे डोज के बाद प्रीकॉशन डोज को बढ़ाए जाने की जरूरत है।
जनवरी 2022 से कोविड वैक्सीन के प्रीकॉशन डोज लगने की शुरूआत हुई थी । शुरूआती दौर में फ्रंटलाइन वर्कर, सुरक्षाकर्मी, 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को ही ये डोज लगाई जा रही थी। वाराणसी के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के हिसाब से लगभग 4 महीने बीतने के बाद भी वाराणसी में प्रीकॉशन डोज की रफ्तार काफी धीमी है। वैक्सीन की दूसरी डोज लेने वालों की संख्या लगभग 76 फीसदी है। वहीं प्रीकॉशन डोज लेने वालों की संख्या महज 15 फीसद पर ही सीमित रह गई है।











