आगरा। आगरा कमिश्नरेट में गीता की कसम खिलाने वाले एक इंस्पेक्टर सुर्खियों में छाए हुए हैं। यह हर खेल में माहिर हैं। अब तक कई कांड भी कर चुके हैं। पीड़ित या आरोपी ने क्या दिया है, यह बात किसी को नहीं बताने को भी खिलाई रही कसम चर्चाओं में रहती है। कोतवाल साहब के द्वारा गीता की कसम खिलाने का मामला एक कैबिनेट मंत्री तक भी पहुंच गया है। उन्होंने इंस्पेक्टर को तत्काल हटाने के लिए कहा है। पुलिस कमिश्नर अचानक देर रात गीता का ज्ञान देने वाले इंस्पेक्टर साहब के थाने में पहुंच गए और देखा कि वह वास्तव में ऑफिस में गीता रखते हैं या नहीं। इसके अलावा उन्हें गीता के श्लोक का कितना ज्ञान है। ज्ञान में वह जीरो पाए गए। इसके बाद इंस्पेक्टर साहब का चेहरा उतर गया।
कमिश्नरेट में एक इंस्पेक्टर देहात के थाने में तैनात हैं। थाने में जो भी व्यक्ति आता है। वह गीता पर हाथ रखवाकर कसम खिला देते हैं। इंस्पेक्टर ने अपनी टेबल में ही गीता रख रखी है। वह यह भी बोलते हैं कि उन्हें पूरी गीता कंठस्थ है। जिसका काम नहीं करना होता है या जिससे मंसूबे पूरे नहीं हो रहे होते हैं, उसे ज्ञान देकर भगा देते हैं। इंस्पेक्टर के द्वारा गीता पर कसम खिलाने के कई मामले अब तक सुर्खियों में भी छा चुके हैं। कई आरोपियों की उन्होंने मदद कर दी है। आलम यह है कि उनके आडंबरी होने की शिकायत एक कैबिनेट मंत्री तक भी पहुंच गई। कैबिनेट मंत्री ने एक अधिकारी को फोन करके कहा गीता वाले इंस्पेक्टर कौन है। बहुत चालू बताए गए हैं। लखनऊ तक उनका मामला आया है। पब्लिक का वह शोषण कर रहे हैं। इंस्पेक्टर को हटाना ही ठीक है। आखिर गीता रखने की बात में कितना दम है यह चेक करने के लिए पुलिस कमिश्नर देर रात कोतवाल साहब के थाने में पहुंच गए। पुलिस कमिश्नर ने धीरे से मुस्कुराते हुए पूछा आप अपने ऑफिस में गीता रखते हैं। कोतवाल को लगा साहब मुझसे खुश हैं मुझे आध्यात्मिक मानते हैं। इसलिए पूछ रहे हैं। इंस्पेक्टर ने टेबल के अंदर से एक नहीं दो गीता निकालकर कमिश्नर साहब के सामने रख दीं। कमिश्नर ने पूछा यह किसकी है। इंस्पेक्टर बोले सर यह प्रेमानंद महाराज जी के द्वारा लिखी हुई हैं, जबकि वह परमहंस योगानंद द्वारा लिखी गई थी। कमिश्नर साहब ने कहा आपको तो यह भी नहीं पता यह किसके द्वारा लिखी हुई हैं। इसके बाद कमिश्नर ने उनसे कहा पूरी गीता का एक भी श्लोक मुझे सुना दो। इंस्पेक्टर का चेहरा उतर गया और वह पसीना देने लगे वह एक श्लोक तक उन्हें नहीं सुना पाए। पसीना इसलिए छूट रहा था, क्योंकि पोल खुल गई थी। पुलिस कमिश्नर ने यह भी कहा तुम्हारी बहुत शिकायतें हैं। इस पर इंस्पेक्टर तरह-तरह की सफाई देने लगे। कहने लगे जीवन में एक रुपया नहीं लिया है। वह समझ गए थे क्या झूठ है और क्या सच। इंस्पेक्टर उस समय और ज्यादा तनाव में आ गए जब पुलिस कमिश्नर ने चाय पीने से भी मना कर दिया। इंस्पेक्टर साहब को गीता के ज्ञान के मामले में डब्बा गोल है। यह बात सभी के सामने उजागर हो गई है। पोल खुलने के बाद इंस्पेक्टर भी तनाव में है। उन्हें अपना विकेट गिरता हुआ दिखाई दे रहा है।











