नई दिल्ली। भयंकर गर्मी और लू की वजह से कई राज्यों में गर्मी की छुट्टियां प्री-पोन कर दी गई हैं। वहीं कुछ राज्यों ने बढ़ते तापमान को देखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किए हैं। कई स्कूलों ने समय सात घंटे से घटाकर चार से पांच घंटे कर दिया है। इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने गर्मी को लेकर स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी की है। स्कूलों की कैंटीनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को ताजा और गर्म खाना ही परोसा जाए। ढीले-ढाले और हल्के रंग के कॉटन के कपड़े पहनने की परमिशन दी जा सकती है। गर्मी से बचने के लिए बच्चे फुल स्लीव्स की शर्ट पहन सकते हैं। स्कूल मैनेजमेंट टाई को ढीली बांधने की परमिशन दें। लेदर शूज की जगह कैनवास शूज पहनने की इजाजत दें।
स्कूल का समय सात बजे शुरू हो सकता है और दोपहर से पहले खत्म हो सकता है।
गर्मी को देखते हुए हर दिन स्कूल के घंटों (स्कूल आवर्स) की संख्या कम की जा सकती है। स्पोर्ट्स और दूसरी आउटडोर एक्टिविटी सुबह करवाने की सलाह दी गई है। स्कूल असेंबली को कम समय में खत्म कर क्लासेस शुरू करने का भी सुझाव है। स्कूली बस और वैन में उतने ही स्टूडेंट्स बैठा सकते हैं, जितनी जगह हो। बस या स्कूल वैन को छाया यानी शेड में खड़ा करना होगा। बस में पीने का पानी और फर्स्ट ऐड किट की फैसिलिटी होनी चाहिए। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आने-जाने वाले बच्चों के पेरेंट्स उन्हें लेने-छोड़ने आएं। जो बच्चे पैदल या साइकिल से आते हैं, वे अपना सिर ढककर रखें।
गर्मी में खाना जल्दी खराब होता है इसलिए बच्चों को टिफिन में ऐसा खाना दिया जाना चाहिए, जो जल्दी खराब न हो। टिफिन के समय बच्चों को हल्का भोजन करने की सलाह दी गई है। पोषण प्रोग्राम के तहत गर्म पका हुआ ताजा खाना परोसा जाना चाहिए। जो टीचर इसके लिए जिम्मेदार हैं, वो परोसने से पहले भोजन की जांच जरूर करें। स्कूल में स्टाफ नर्स के पास इस मौसम से जुड़ी बीमारियों की दवाई होनी चाहिए। डॉर्मिटरी में खिड़कियों और दरवाजों पर पर्दे लगे होने चाहिए। बच्चों को नींबू पानी, छाछ और फ्रूट्स प्रॉपर दिया जाना चाहिए। बच्चों को स्पाइसी फूड की जगह लाइट फूड दिया जाना चाहिए। क्लास रूम, हॉस्टल और डाइनिंग हाल में पानी और बिजली हमेशा रहे। स्पोर्ट्स एक्टिविटी शाम के समय आयोजित की जानी चाहिए।











