-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। नाम-अरविंद कुमार, पद- इंस्पेक्टर थाना- हरीपर्वत। यह वह नाम है जिसे शायद ही पुलिस विभाग में कोई नहीं जानता हो। कार्यशैली ही उनकी पहचान है। जैसे-जैसे साल बढ़ती है। उनकी वर्दी पर मेडल की संख्या भी बढ़ती जाती है। अभी तक की सेवा में शायद ही ऐसा कोई मेडल होगा जो उन्हें नहीं मिला हो। आखिर वह क्यों सभी की पहली पसंद रहते हैं। इस बात को भी वह समय-समय पर साबित करते रहते हैं। सोमवार को पुलिस कमिश्नर द्वारा कराई गई साइबर क्राइम संबंधी परीक्षा में नंबर वन आकर फिर से उन्होंने साबित कर दिया है कि बेहतर पुलिसिंग से लेकर साइबर संबंधी मामले में जानकारी रखने में वह पहले नंबर पर हैं।
साइबर संबंधी मामले की इंस्पेक्टर, दरोगा, कॉन्स्टेबल को कितनी जानकारी है, यह चेक करने के लिए सोमवार को पुलिस कमिश्नर डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने परीक्षा कराई। परीक्षा में इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक शामिल हुए। इंस्पेक्टर की बात करें तो पहले नंबर पर इंस्पेक्टर हरीपर्वत अरविंद कुमार रहे। इससे पूर्व नवंबर माह में जो परीक्षा हुई थी उसमें भी इंस्पेक्टर हरी पर्वत नंबर वन पर रहे थे। इंस्पेक्टर हरीपर्वत के आज भी परीक्षा में 50 में से 45 अंक आए हैं। इसके साथ ही एसीपी में एसीपी बाह के 50 में से 44, एसीपी अंशिका वर्मा के 50 में से 43, एसीपी रवि कुमार गुप्ता के 50 में से 43 नंबर आए हैं। एसीपी अंशिका वर्मा अभी अंडर ट्रेनी है और वह अन्य एसीपी से ज्यादा नंबर लेकर आईं हैं। तमाम एसीपी जो अपने ज्ञान का प्रदर्शन करते हैं कि हमसे बेहतर कोई नहीं है, उनकी पोल परीक्षा में खुल गई है। अधिकारी भी समझ गए हैं वह हवाई हैं। इसके साथ ही इंस्पेक्टरों और दरोगाओं की बात करें तो कई परीक्षा में फिसड्डी साबित हुए हैं। विभाग ने उनके नंबर इसलिए सार्वजनिक नहीं किए गये जिससे उनकी बेइज्जती ना हो जाए। इन्होंने भी साइबर सेल में पुलिस कर्मियों को फोन कर निवेदन किया है कि उनके नंबर किसी को नहीं बताया जाए। कुछ इंस्पेक्टर रंगबाज टाइप के हैं जो अपने साथी इंस्पेक्टरों से अपने को बेहतर साबित करते हैं। उन्होंने यह दिखा दिया है वह अन्य मामलों में तो नंबर वन आ सकते हैं लेकिन पुलिसिंग के मामले में नहीं। दरोगाओं में नंबर वन मनवीर सिंह, हेड कांस्टेबल में लाखन सिंह, कॉन्स्टेबल में श्रीकांत शर्मा आए हैं।
परीक्षा में निरीक्षक, उपनिरीक्षक, हेड कॉन्स्टेबल, कॉन्स्टेबल को मिलाकर 1827 पुलिसकर्मी शामिल हुए। परीक्षा का उद्देश्य था कि साइबर क्राइम की विवेचना में थाना प्रभारियों को मदद मिल सके व नई-नई तकनीकों की जानकारी हो सके।
पुलिस कमिश्नर की रडार पर कई प्रभारी
पुलिस सूत्रों का कहना है कि कमिश्नरेट में कई सीओ और थाना प्रभारी पुलिस कमिश्नर के रडार पर हैं। जल्दी ही वह साइडलाइन किए जा सकते हैं। अछनेरा सर्किल में एक थाने के प्रभारी से अधिकारी भी परेशान हैं उन्हें मजबूरीवश चार्ज पर रखा गया था। अब उनका विकेट गिर सकता है। इन्हें कानूनी संबंधी कोई जानकारी नहीं है। छत्ता सर्किल में भी दो प्रभारियों को साइड लाइन किया जा सकता है। एक वह हैं जिनकी कार्यशैली और मानसिकता से पूरा थाना दुखी है। दूसरे वह जो अपने घर में से बाहर नहीं निकलते। इसी प्रकार खेरागढ़, फतेहाबाद, लोहामंडी, सदर सर्किल में भी कुछ प्रभारी दाएं बाएं किए जा सकते हैं। एसीपी की बात करें तो इनके भी आपस में फेरबदल होने की संभावनाएं हैं। कुछ की कार्यशैली से बड़े अधिकारी संतुष्ट नहीं हैं। एक तो एक नेता जी के नाम पर रुतबा बनाकर दबाकर फीलगुड करने में लगे हुए हैं।











