-पीयूष गौतम-
नई दिल्ली। भारत ने बातचीत की मेज पर तो चीन को खरी-खरी सुना ही दी, सिलीगुड़ी में सैन्य अभ्यास से सख्त संदेश भी दे दिया। अचनाक दिल्ली दौरे पर आए चीनी विदेश मंत्री वांग यी को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कह दिया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते तब तक सामान्य नहीं हो सकते, जब तक चीन की तरफ से सीमा पर तनाव खत्म नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं, जब यी नई दिल्ली में थे, उस वक्त भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स सिलीगुड़ी में युद्धाभ्यास कर रहे थे। निश्चित रूप से चीन ने जयशंकर के जवाब और सेना के युद्धाभ्यास के संयुक्त संदेश को डिकोड कर लिया होगा। मानो चीन की तंद्रा तोड़ने के लिए इतना काफी नहीं था कि वांग यी को विदा करके जयशंकर मालदीव और श्रीलंका दौरे पर चल पड़े।
सबसे पहले बात चीन को लक्षित भारतीय सेना के युद्धाभ्यास की। सेना की एयरबोर्न रैपिड रिस्पांस टीमों के करीब 600 पैराट्रूपर्स ने अलग-अलग एयरबेस से एयरलिफ्ट किए जाने के बाद 24 मार्च और 25 मार्च को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास एक एयरबोर्न एक्सरसाइज में बड़े पैमाने पर ड्रॉप्स को अंजाम दिया। अभ्यास में उन्नत हवाई प्रविष्टि तकनीक या सैनिकों को एयरड्रॉप करना, निगरानी और टारगेट प्रैक्टिस शामिल था। सिलीगुड़ी कॉरिडोर चीन के साथ देश की उत्तरी सीमा के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमा के पास है। कॉरिडोर को सैन्य दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और यह पूर्वोत्तर क्षेत्र को भारत से जोड़ता है। पश्चिम बंगाल में 60 किमी लंबे और 22 किमी चौड़े सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक के नाम से भी जाना जाता है।
अब बात चीन को चिंता में डालने वाले भारत के एक और कदम की। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर कल ही मालदीव पहुंचे और वहां भारत समर्थित कई प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन किया। जयशंकर ने मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह और विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद से अड्डू शहर में मुलाकात की। भारत और मालदीव के बीच समय की कसौटी पर परखे रिश्ते को क्षेत्र में स्थिरता के लिए ताकत बताते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी इसे पोषित और मजबूत करने की है। मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में जयशंकर ने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंध दोनों देशों के लोगों की जिंदगियों को छूने के वास्ते एक बड़ी छलांग के लिए तैयार हैं, जैसा कि पहले कभी नहीं देखा गया। मालदीव के विदेश मंत्री ने ट्वीट किया कि आपने इतिहास रच दिया डॉ. जयशंकर! पहली बार राजधानी माले के बाहर आधिकारिक बातचीत हुई है। भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करना मालदीव की विदेश नीति की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
भारतीय विदेश मंत्री 28 से 30 मार्च के बीच श्रीलंका में रहेंगे। उनका श्रीलंका दौरा उस वक्त हो रहा है जब पड़ोसी देश अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। भारत जनवरी से अब तक श्रीलंका को 2.4 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता दे चुका है। उधर, चीन कर्ज के बदले श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह पर कब्जा कर चुका है। बहरहाल, श्रीलंका में रहते हुए, जयशंकर 29 मार्च को कोलंबो में बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 30 मार्च को पांचवें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि मालदीव और श्रीलंका दोनों हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रमुख समुद्री पड़ोसी हैं और प्रधानमंत्री के सागर और नेबरहुड फर्स्ट के दृष्टिकोण में विशेष स्थान रखते हैं।











